
बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
लगभग दो दशक पुराने बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही राज्य की राजनीति और न्यायिक इतिहास में एक अहम अध्याय जुड़ गया है। अदालत ने अपने आदेश की प्रति आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड कर दी है और आरोपी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता रामावतार जग्गी की 4 जून को हत्या कर दी गई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी की सरकार थी और घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। शुरुआत में इस मामले की जांच राज्य पुलिस ने की, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी।
सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद अमित जोगी सहित कई आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद रायपुर की निचली अदालत ने 31 मई 2007 को सुनवाई पूरी करते हुए 28 आरोपियों के खिलाफ आरोपों को सिद्ध माना, लेकिन सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। इस फैसले को सीबीआई ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वर्ष 2011 में देरी के आधार पर याचिका खारिज कर दी गई थी। साथ ही राज्य सरकार और मृतक के परिजनों द्वारा दायर याचिकाएं भी खारिज कर दी गई थीं।
हालांकि, इस मामले ने नया मोड़ तब लिया जब उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष नवंबर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले में सीबीआई की याचिका पर पुनर्विचार करे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई और सभी तथ्यों एवं साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद अदालत ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मृतक रामावतार जग्गी छत्तीसगढ़ के एक प्रभावशाली कारोबारी और सक्रिय राजनेता थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और उनके साथ कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हुए थे। पार्टी में उन्हें कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो गई थी।
इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां इसे न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लंबे समय से लंबित इस मामले में आया यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि न्याय में भले देरी हो, लेकिन अंततः न्याय मिलता जरूर है।


















