
, जलवायु परिवर्तन विभाग छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में 20 मई 2026 को में परंपरागत लोक वैद्यों का सफल एवं भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए पारंपरिक वैद्य, ग्राम पदाधिकारी एवं समाज के गणमान्य सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक वैद्य एवं ग्राम पदाधिकारी संघ छत्तीसगढ़ के संरक्षक के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र सदियों से जड़ी-बूटी एवं वनौषधियों का समृद्ध केंद्र रहा है तथा यहां अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें संरक्षित एवं विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री का भी विजन है कि परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर कम लागत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पूरे विश्व तक पहुंचाई जा सकती हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पारंपरिक वैद्य एवं ग्राम पदाधिकारी संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष ने कहा कि बस्तर के जंगलों में अति दुर्लभ औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के लोक वैद्य सदियों से गंभीर बीमारियों का उपचार करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि लोक वैद्य आधुनिक विज्ञान के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें।
उन्होंने शासन एवं प्रशासन से मांग की कि लोक वैद्यों को आयुष्मान योजना से सीधे जोड़ा जाए तथा शासन द्वारा संचालित आयुर्वेद अस्पतालों से समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को उचित पहचान और सम्मान मिल सके। इस अवसर पर उन्होंने अनेक वनौषधियों एवं उनके औषधीय उपयोगों की जानकारी भी साझा की।
उन्होंने आगे कहा कि बस्तर क्षेत्र के लोग अपने पारंपरिक खान-पान में मंडिया, कोदो, कुटकी, रागी, कुल्थी एवं बाजरा जैसी पौष्टिक फसलों का उपयोग सदियों से करते आ रहे हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी हैं। साथ ही अनेक प्रकार की वनस्पतियों, फल-फूल एवं भाजियों का सेवन यहां की संस्कृति और जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
अंत में उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन पारंपरिक ज्ञान, लोक चिकित्सा एवं जनजातीय विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय कुम्हारवंड, जगदलपुर में लोक वैद्यों का भव्य कार्यक्रम सम्पन्न">

















