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आयुर्वेद से बिना ऑपरेशन मोतियाबिंद में राहत: कोरबा के ऑटो चालक की लौटी रोशनी, बढ़ी वैकल्पिक उपचार पर भरोसे की चर्चा

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Written by
Sanjana Dewangan

 

कोरबा, 21 मार्च 2026 । आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को लेकर लंबे समय से यह धारणा रही है कि इसके परिणाम धीरे-धीरे मिलते हैं और गंभीर बीमारियों में इसकी भूमिका सीमित होती है। लेकिन कोरबा से सामने आया एक मामला इस सोच को चुनौती देता नजर आ रहा है। यहां एक ऑटो चालक ने बिना ऑपरेशन के आयुर्वेदिक उपचार से मोतियाबिंद में राहत मिलने का दावा किया है, जिससे लोगों के बीच वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

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जानकारी के अनुसार, कोरबा निवासी ऑटो चालक मुन्ना साहू को कुछ समय पहले आंखों में धुंधलापन महसूस होने लगा था। समस्या बढ़ने पर उन्होंने नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराई, जहां उन्हें मोतियाबिंद की पुष्टि हुई और ऑपरेशन की सलाह दी गई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे ऑपरेशन कराने में असमर्थ थे, जिसके चलते उन्होंने आयुर्वेदिक उपचार का विकल्प चुना।

इसी दौरान उन्होंने निहारिका क्षेत्र स्थित आयुर्वेदाचार्य एवं नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा से संपर्क किया। डॉक्टर के मार्गदर्शन में उनका उपचार प्रारंभ किया गया। बताया जा रहा है कि नियमित औषधि सेवन और चिकित्सकीय देखरेख के बाद कुछ ही समय में उन्हें राहत मिलने लगी। धीरे-धीरे उनकी दृष्टि में सुधार हुआ और अब वे पहले की तरह सामान्य रूप से अपना ऑटो चलाने लगे हैं।

डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में नेत्र रोगों के उपचार का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस उपचार के दौरान ‘अक्षितर्पण’ नामक विशेष पंचकर्म प्रक्रिया का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में आंखों के चारों ओर आटे का घेरा बनाकर उसमें औषधीय घृत और जड़ी-बूटियों से तैयार द्रव डाला जाता है, जिससे आंखों को पोषण मिलता है और रक्त संचार में सुधार होता है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया कई नेत्र रोगों में लाभकारी सिद्ध होती है।

हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि मोतियाबिंद एक गंभीर नेत्र रोग है, जिसके उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति में ऑपरेशन को सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। ऐसे में किसी भी वैकल्पिक उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है, ताकि मरीज को किसी प्रकार की जटिलता का सामना न करना पड़े।

कोरबा का यह मामला अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर लोग आयुर्वेदिक चिकित्सा की संभावनाओं को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला न केवल आयुर्वेदिक उपचार पद्धति की उपयोगिता पर प्रकाश डालता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और नियमित उपचार से वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियां भी कई मामलों में राहत प्रदान कर सकती हैं। हालांकि, स्वास्थ्य के मामले में किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

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