
कोरबा, 31 दिसम्बर 2025/
कहते हैं कि अगर इरादे मज़बूत हों तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। इस कहावत को सच कर दिखाया है कोरबा जिले के कोरबा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कछार निवासी किसान गोपाल सिंह कँवर ने, जिन्होंने सीमित भूमि होने के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा की मिसाल कायम की है।
लगभग दो एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले गोपाल सिंह मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। उनका कहना है कि बीते कुछ वर्षों में शासन द्वारा किसानों के हित में लिए गए फैसलों से खेती लाभ का सौदा बनती जा रही है। विशेष रूप से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। वर्तमान में प्रति क्विंटल धान का मूल्य ₹3100 मिलने से किसानों को अपनी मेहनत का उचित फल प्राप्त हो रहा है।
गोपाल सिंह बताते हैं कि इस वर्ष उन्होंने अपने एक एकड़ खेत से लगभग 20 क्विंटल धान का विक्रय किया है। यही नहीं, पिछले वर्ष भी उत्पादन लगभग इसी स्तर का रहा। इससे प्राप्त आय का सदुपयोग उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा में किया, जिससे उनके परिवार के भविष्य को मजबूती मिली है। वे मानते हैं कि खेती से मिली स्थायी आमदनी ने उन्हें अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का आत्मविश्वास दिया है।
इसके अतिरिक्त कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत मिलने वाली अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि से उनकी आय में और वृद्धि हुई है। गोपाल सिंह का कहना है कि शासन की यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे किसानों को खेती में निवेश करने, उन्नत बीज, खाद और अन्य संसाधन जुटाने में मदद मिलती है।
धान खरीदी केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं की भी गोपाल सिंह सराहना करते हैं। उनका कहना है कि केंद्रों में व्यवस्थित तौल, समय पर भुगतान और आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने से किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। इससे किसानों का विश्वास शासन व्यवस्था पर और अधिक मजबूत हुआ है।
कम ज़मीन होने के बावजूद गोपाल सिंह कँवर की कहानी यह साबित करती है कि यदि किसान योजनाओं की जानकारी रखे और उनका सही तरीके से लाभ उठाए, तो खेती न केवल आजीविका का साधन बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार बन सकती है। उनकी सफलता आज क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने और सरकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
गोपाल सिंह जैसे मेहनती किसान वास्तव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जिनके प्रयासों से कृषि क्षेत्र सशक्त हो रहा है और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को बल मिल रहा है।


















