
कोरबा/पौड़ी-उपरोड़ा।
पौड़ी-उपरोड़ा शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शासन द्वारा लागू युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया, जिसका उद्देश्य था बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों की सही तैनाती सुनिश्चित करना, विभागीय मिलीभगत और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है।
सबसे बड़ा आरोप स्थानीय बीईओ के.आर. दयाल पर लगा है। आरोप है कि उन्होंने कुछ शिक्षकों को एक साथ दो-दो पदों पर कार्य करने की अनुमति दी और अब जब मामला मीडिया में उजागर हुआ, तो अपनी गलती छुपाने के लिए उन्हीं शिक्षकों से खंडन समाचार लिखवाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
50 किलोमीटर दूर दोहरी जिम्मेदारी!
सूत्रों के अनुसार, सहायक शिक्षिका प्रिया नागवंशी प्राथमिक शाला केंदहाड़ाड में पदस्थ हैं, जबकि वे आज भी आदि कन्या आश्रम, तुमान में अधीक्षिका के रूप में कार्यरत हैं।
दोनों संस्थानों के बीच की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है। ऐसे में एक व्यक्ति का रोजाना दोनों स्थानों पर उपस्थित होना असंभव है। बावजूद इसके, बीईओ दयाल ने स्वयं लिखित अनुमति देकर इस अनियमितता को संरक्षण दिया।
खंडन का खेल – भ्रष्टाचार छुपाने की कोशिश
जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई कि एक ही शिक्षक को दो पदों पर काम करने दिया गया, विभाग में खलबली मच गई।
बीईओ दयाल ने तुरंत संबंधित शिक्षिका से खंडन जारी करवाया। लेकिन इस खंडन में भी उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वे दोनों जगह कार्यरत हैं।
यानी सच दबाने की कोशिश ने ही विभाग की पोल खोल दी।
प्रधानपाठक प्रभार पर भी सवाल
केंदहाड़ाड स्कूल की प्रधानपाठक सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, लेकिन उनके स्थान पर किसी नियमित शिक्षक को प्रभार नहीं दिया गया। सूत्रों का कहना है कि प्रिया नागवंशी की माता भी वहीं शिक्षिका रही हैं और दोनों आपसी समझ से एक-दूसरे को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
इसी तरह खुर्रुभाठा में लक्ष्मी सिदार प्रधान पाठक है और हरदी बाजार अधीक्षिका का पद संभाल रही है नदिया पार सालिहाभाठा के शिक्षक पौड़ी उपरोड़ा मैं अधीक्षिका है , जो एक जगह पदस्थ होकर दूसरी जगह अधीक्षिका का कार्य कर रहे हैं।
सरकारी योजनाओं पर आंच
छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा सुधार के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं –
- आश्रम शालाओं को सुदृढ़ करने की पहल,
- हर स्कूल में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात संतुलित करने का लक्ष्य,
- और युक्तियुक्तिकरण से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना।
लेकिन बीईओ दयाल जैसे अधिकारी इन योजनाओं को मजाक बना रहे हैं।
एक ही शिक्षक को दो जगह बैठाना न सिर्फ योजना का अपमान है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
ग्रामीणों और पंचायत अध्यक्ष की सख्त मांग
ग्रामीणों का कहना है कि –
“जब बच्चों के लिए शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो योजनाएं कागजों में ही सीमित रह जाएंगी। विभाग की मिलीभगत ने बच्चों की पढ़ाई बर्बाद कर दी है।”
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने भी कहा –
“भ्रष्टाचार और अनियमितता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उच्च स्तरीय जांच होगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।”
निष्कर्ष – जांच और कार्रवाई से ही बहाल होगा विश्वास
यह मामला केवल एक शिक्षिका या एक बीईओ का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की साख से जुड़ा है।
- यदि बीईओ के.आर. दयाल ने नियम विरुद्ध अनुमति दी, तो उन पर तत्काल विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।
- यदि खंडन के बहाने भ्रष्टाचार छुपाने का प्रयास किया गया, तो इसकी भी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
जनता अब एक ही सवाल पूछ रही है –
क्या सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी, या फिर दोषियों पर कार्रवाई कर बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा?




















