
कोरबा/पौड़ी-उपरोड़ा।
विकासखंड पौड़ी-उपरोड़ा में शिक्षा विभाग बीईओ के आर दयाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ शिक्षकों को एक साथ दो-दो पदों पर काम करने की अनुमति मिल रही है, जिससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी हो रहा है।
प्रिया नागवंशी का मामला चर्चा में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्राथमिक शाला केंदहाड़ाड में पदस्थ सहायक शिक्षिका प्रिया नागवंशी फिलहाल आदि कन्या आश्रम तुमान में अधीक्षिका के रूप में भी कार्यरत बताई जा रही हैं। सवाल उठता है कि कोई एक व्यक्ति एक साथ दो पदों पर कैसे कार्य कर सकता है? जबकि नियमानुसार एक ही पद पर सेवा देनी होती है।
श्रीमती प्रिया नागवंशी वास्तव में कन्या आश्रम तुमान में ही हैं और वहीं अधीक्षिका का कार्य संभाल रही हैं। जबकि उनके आवेदन में यह उल्लेख किया गया है कि “केंदहाड़ाड स्कूल उनके निवास से 50 किलोमीटर दूर है और रोजाना शिशु के साथ बस से आना-जाना कठिन है।” इसके आधार पर उन्हें आश्रम में ही कार्य करने की मौखिक अनुमति दी गई बताई जाती है।
प्रधानपाठक प्रभार पर भी सवाल
मामला केवल इतना ही नहीं है। सूत्रों का कहना है कि केंदहाड़ाड स्कूल की प्रधानपाठक सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उनके स्थान पर नियमित प्रभार किसी अन्य को दिए जाने के बजाय,प्रतिनियुक्ति कर परिजनों और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से कामकाज प्रभावित किया जा रहा है। बताया जाता है कि श्रीमती नागवंशी की माता भी शिक्षिका हैं और दोनों आपसी समझ से एक-दूसरे को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
रिलीव होने के बाद भी पदस्थ और वेतन
सूत्रों के अनुसार, कुछ शिक्षक जिन्हें पहले अन्य शालाओं से रिलीव किया गया था, वे अब भी संलग्न शालाओं या आश्रम में कार्यरत हैं और उनका वेतन नियमित रूप से जारी है। यह युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता का संकेत देता है।

BEO के संरक्षण का आरोप
सूत्रों की जानकारी के अनुसार बीईओ के.आर. दयाल के संरक्षण में यह अनियमितताएं चल रही हैं। जब उनसे फोन पर इस विषय में जानकारी ली गई, तो कथित तौर पर उन्होंने कहा कि “बच्चों की परीक्षा दिलवाने के बाद शिक्षिका तुमान आश्रम में अधीक्षिका का कार्य कर सकती हैं।” प्रश्न यह है कि यदि स्कूल और आश्रम 50 किलोमीटर की दूरी पर हैं तो रोजाना दोनों जगह उपस्थिति संभव कैसे है?
अन्य उदाहरण भी सामने आए
यह कोई अकेला मामला नहीं है। सूत्र बताते हैं कि प्राथमिक शाला खुर्रुभाठा की प्रधानपाठक लक्ष्मी सिदार ज्वाइनिंग के बाद से स्कूल नहीं आ रही हैं और हरदी बाजार में अधीक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। इसी तरह नदियापार सालिहाभाठा की स्वर्णलता भारती ,सहायक शिक्षक रहते हुए आश्रम पोंडीउपरोड़ा में अधीक्षिका का कार्य कर रही हैं। यह सब जानते हुए भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
बच्चों का भविष्य दांव पर
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि युक्तियुक्तिकरण का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की सही तैनाती करना था, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। लेकिन यदि एक ही शिक्षक को दो-दो पदों पर अनुमति दी जा रही है, तो यह न केवल शासन की महत्वाकांक्षी योजना का मजाक है, बल्कि बच्चों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ है।
कार्रवाई की मांग
मिली जानकारी के अनुसार ऐसे मामलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। विशेषकर पौड़ी-उपरोड़ा में बीईओ कार्यालय की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर शिक्षा संकट का रूप ले सकता है।
अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद शासन-प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला महज कागज़ों तक ही सीमित रह जाएगा?
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन ऐसे मामलों पर सख्त कदम उठाकर शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाएगा या फिर संरक्षण देकर केवल मुखदर्शन करता रहेगा?




















