
रायगढ़, 18 दिसम्बर
जिले के बंगुरसिया धान खरीदी केंद्र में बीते दिनों जंगली हाथियों की मौजूदगी ने किसानों और कर्मचारियों को सतर्क कर दिया है। रात के अंधेरे में हाथियों के एक दल ने खरीदी केंद्र में प्रवेश कर करीब 15 बोरी धान को नुकसान पहुंचाया, जबकि कुछ अन्य बोरियों को फैलाकर आंशिक रूप से बर्बाद कर दिया। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, जो प्रशासन और स्थानीय सतर्कता का सकारात्मक संकेत है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देर रात जंगल की ओर से आए हाथियों के झुंड ने खुले में रखे धान को देखकर खरीदी केंद्र की ओर रुख किया। हाथियों ने बोरियों को उठाकर धान खाना शुरू कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में हलचल का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों और ग्रामीणों ने दूरी बनाए रखी और किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचाव किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभागों ने संज्ञान लिया। यह क्षेत्र हाथी प्रभावित माना जाता है, जहां वन विभाग पहले से ही निगरानी करता रहा है। प्रशासन का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है, और धान खरीदी केंद्रों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।
पूरी घटना धान खरीदी केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है, जिससे वास्तविक स्थिति का आकलन करने में प्रशासन को मदद मिल रही है। साथ ही, ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिससे इस समस्या की गंभीरता व्यापक स्तर पर सामने आई है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचाव के लिए रात्री गश्त बढ़ाने, अस्थायी फेंसिंग, प्रकाश व्यवस्था सुदृढ़ करने और वन विभाग की त्वरित टीम तैनात करने जैसे उपायों पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, खरीदी केंद्रों में धान को खुले में रखने के बजाय सुरक्षित भंडारण व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
किसानों ने भी प्रशासन द्वारा समय-समय पर की जा रही कार्रवाई और सजगता की सराहना की है। उनका कहना है कि यह इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है, ऐसे में हाथियों की आवाजाही स्वाभाविक है, लेकिन प्रशासन के सहयोग से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
शासन की मंशा स्पष्ट है कि किसानों की मेहनत की फसल सुरक्षित रहे और धान खरीदी व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो। इस दिशा में जिला प्रशासन, वन विभाग और सहकारी संस्थाएं आपसी समन्वय से कार्य कर रही हैं।
निष्कर्षतः, बंगुरसिया धान खरीदी केंद्र की घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की चुनौती को सामने रखा है, लेकिन प्रशासन की तत्परता और सकारात्मक पहल से यह स्पष्ट है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम मजबूती से उठाए जा रहे है




















