
सिर्फ 1 एकड़ में 5 लाख की आय, उद्यानिकी विभाग की पहल बनी वरदान
बालोद, 04 दिसंबर 2025
डौंडी विकासखण्ड के वनांचल ग्राम अड़जाल में रहने वाले किसान संतोष कुमार आज जिले के उन प्रेरणादायी किसानों में शामिल हो चुके हैं, जिन्होंने आधुनिक तकनीक अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सहायता से संतोष ने ग्राफ्टेड बैंगन तकनीक अपनाकर वह उपलब्धि हासिल की है, जिसकी कभी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।
पहले संतोष कुमार अपनी एक एकड़ भूमि पर परंपरागत तरीके से खरीफ धान की खेती करते थे, लेकिन उत्पादन और लाभ इतना कम था कि खेत कई बार पड़त रखना मजबूरी हो जाती थी। आर्थिक स्थिति सुधरने के बजाय लगातार कमजोर होती जा रही थी। इसी बीच उन्हें उद्यानिकी विभाग की योजनाओं और तकनीकी सुविधाओं की जानकारी मिली, जिसमें किसानों को अनुदान पर हाईब्रिड पौधे और बीज उपलब्ध कराए जाते हैं।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें ग्राफ्टेड बैंगन की उन्नत और लाभदायक खेती अपनाने की सलाह दी, जिसे संतोष ने साहस के साथ अपनाया। संतोष ने अपनी एक एकड़ जमीन में 30 हजार ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे रोपे। यह तकनीक पौधों को अधिक उत्पादन देने, रोगों से बचाव और लंबी आयु प्रदान करने के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।
कुछ ही महीनों में जब उत्पादन शुरू हुआ, तो संतोष की मेहनत रंग लाने लगी। घर के लिए पर्याप्त सब्जियां मिलने के साथ-साथ बाजार में सीधे विक्रय से उनकी शुरूआती आय बढ़ने लगी। संतोष कुमार अब तक लगभग 250 क्विंटल बैंगन का उत्पादन कर चुके हैं, जिसे वह वर्तमान बाजार मूल्य 20 से 25 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। इससे उन्हें अब तक करीब 5 लाख रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है — वह भी केवल एक एकड़ भूमि से।
किसान संतोष बताते हैं कि ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक टिकाऊ और लाभदायक साबित हुई है। पौधे रोगों से कम प्रभावित होते हैं, उत्पादन ज्यादा मिलता है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। उन्होंने कहा कि अगर उद्यानिकी विभाग ने उन्हें यह तकनीक और सहायता न दी होती, तो वे कभी इतनी आय की कल्पना भी नहीं कर पाते।
उद्यानिकी विभाग की पहल से आज संतोष जैसे कई किसान नई तकनीकों को अपनाकर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। यह तकनीक न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें उद्यानिकी क्षेत्र में नए अवसर और आत्मनिर्भरता भी प्रदान कर रही है।
किसान संतोष की सफलता की कहानी पूरे जिले के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। उनका सफर यह साबित करता है कि सही तकनीक, सरकारी सहयोग और मेहनत से छोटी जमीन पर भी बड़ा और स्थायी लाभ अर्जित किया जा सकता है।




















