
कोरबा, 29 नवम्बर 2026/
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में पारदर्शिता और जवाबदेही को नई दिशा देते हुए कोरबा जिले में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की शुरुआत की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब योजना से जुड़ी हर जानकारी सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके मोबाइल पर प्राप्त की जा सकेगी। यह प्रणाली न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण नागरिकों को विकास कार्यों की निगरानी का अधिकार भी देगी।
योजना के संचालक श्री तारन प्रकाश सिन्हा के मार्गदर्शन में यह व्यवस्था पूरे जिले में लागू की जा रही है। ग्राम पंचायत भवनों, प्रमुख सार्वजनिक स्थलों तथा स्वीकृत आवासों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जा रहे हैं। इन कोड को स्कैन करते ही ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत आवासों की संख्या, निर्माण कार्य की प्रगति, स्वीकृत राशि, जारी धनराशि और व्यय का विस्तृत विवरण देख सकेंगे। इससे योजना से जुड़ी सभी जानकारी पूरी तरह सार्वजनिक और सुलभ हो जाएगी।
जिले में इस डिजिटल व्यवस्था को कलेक्टर श्री अजीत वसंत के निर्देश एवं जिला पंचायत सीईओ श्री दिनेश कुमार नाग की निगरानी में तेजी से लागू किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यह पहल ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी सीधे उनके हाथों में पहुंचाएगी और किसी भी स्तर पर होने वाली अनियमितताओं को रोकने में सहायक सिद्ध होगी।
सीईओ जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग ने बताया कि क्यूआर कोड आधारित प्रणाली ग्रामीणों को empowered बनाती है। अब कोई भी नागरिक यह देख सकेगा कि उसके गांव में कितने आवास स्वीकृत हुए, किस लाभार्थी को कितनी राशि मिली और निर्माण किस अवस्था में है। उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि जनता का शासन पर विश्वास भी और मजबूत होगा।
यह पहल ग्रामीणों को केवल योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि गाँव के विकास का सक्रिय प्रहरी बनाती है। ग्रामीण अब स्वयं जांच कर पाएंगे कि विकास कार्य समय पर हो रहे हैं या नहीं, जिससे जनभागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार की पारदर्शिता एवं जनसहभागिता की नीति को साकार करते हुए यह व्यवस्था कोरबा जिले के सभी जनपद पंचायतों में लागू की जा रही है, जिससे जिले का प्रत्येक नागरिक डिजिटल माध्यम से जुड़ सके।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में क्यूआर कोड आधारित यह तकनीकी पहल कोरबा जिले को पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित प्रशासन का उत्कृष्ट मॉडल बनाती है। यह व्यवस्था विकास कार्यों पर जनता की सीधी नजर सुनिश्चित करते हुए सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।


















