
रायपुर, 29 नवंबर 2025।
छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़े महिला स्व-सहायता समूह लगातार नई उपलब्धियाँ हासिल कर रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जनपद पंचायत पेंड्रा के ग्राम कोटमीकला की गोडवाना महिला स्व-सहायता समूह ने मेहनत और सामूहिक प्रयासों से मछली पालन और सिंघाड़ा की खेती में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। इन गतिविधियों ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा आधार भी प्रदान किया है।
समूह की महिलाएँ पिछले वर्ष पंचायत से मात्र 5 हजार रुपये वार्षिक ठेके पर एक तालाब लेकर आजीविका गतिविधि शुरू की। महज 2 हजार रुपये के मछली बीज डालकर उन्होंने एक ही सीजन में 18 हजार रुपये से अधिक की मछली बिक्री कर अपनी पहली सफलता दर्ज की। यह उपलब्धि महिलाओं के आत्मविश्वास को इतना बढ़ा गई कि उन्होंने उसी तालाब में सिंघाड़ा की खेती शुरू कर दी।
सिंघाड़ा की खेती ने समूह की आय में और अधिक बढ़ोतरी की है। अब तक महिलाएँ 15 से 20 हजार रुपये मूल्य के सिंघाड़े बेच चुकी हैं, जबकि लगभग 70 से 80 हजार रुपये का सिंघाड़ा तालाब में तैयार है, जिसे लगातार निकालकर स्थानीय बाजारों में बेचा जा रहा है। इससे उनकी कुल आय में भारी वृद्धि हुई है, और ये महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बनने की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।
समूह की सदस्य श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि महिलाएँ खाली समय का सदुपयोग करते हुए अगरबत्ती निर्माण भी करती हैं। तैयार अगरबत्तियों को स्थानीय हाट-बाजार और दुकानों में बेचकर वे अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई है।
बिहान मिशन के तहत ग्राम कोटमीकला में स्थापित आजीविका सेवा केंद्र महिलाओं को कृषि, पशुपालन, प्रसंस्करण और अन्य आय-वर्धक गतिविधियों के लिए निरंतर प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान कर रहा है। इसी सहयोग और महिलाओं के सामूहिक परिश्रम ने गाँव में आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा है।
गोडवाना महिला स्व-सहायता समूह की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत से ग्रामीण महिलाएँ आर्थिक प्रगति का सशक्त उदाहरण बन सकती हैं।




















