
कोरबा, 17 नवंबर
भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, जिला कोरबा द्वारा आयोजित दो दिवसीय कब-बुलबुल उत्सव का भव्य समापन छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल, झाबर दीपका में हुआ। इस आवासीय शिविर में जिले की विभिन्न प्राथमिक शालाओं से लगभग 200 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पहली बार ऐसे शिविर में शामिल हुए इन नन्हे प्रतिभागियों ने कब व बुलबुल के सिद्धांत—“कोशिश करो”—को अपने व्यवहार में उतारते हुए ज्ञान, अनुशासन, सहयोग और नेतृत्व क्षमता का अद्भुत प्रदर्शन किया।
शिविर के दौरान बच्चों को प्रवेश से लेकर गोल्डन एरो तक के पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण सत्रों में ध्वज शिष्टाचार, बड़ी सलामी, विशाल गर्जना, टोली विभाजन, कलरव, लाल फूल, बुलबुल ग्रीटिंग, जंगल बुक आधारित गतिविधियाँ, पक्षियों के गीत, शिविर ज्वाल जैसे प्रेरणादायक विषय शामिल थे। साथ ही जुम्बा, समूह आधारित खेल, नैतिक कहानियाँ और अनुशासनात्मक अभ्यासों ने बच्चों में आत्मविश्वास और एकता की भावना को मजबूत किया।

ग्रैंड कैंप फायर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला आयुक्त (स्काउट) ताम्रेश्वर उपाध्याय रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा—
“कब-बुलबुल उत्सव बच्चों को खेल-खेल में जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य सिखाता है। इस तरह के शिविर राष्ट्रप्रेम, आत्म-अनुशासन, नेतृत्व और आपसी सहयोग की भावना पैदा करते हैं। छोटे बच्चों में ये संस्कार जितने जल्दी पड़ते हैं, भविष्य उतना ही उज्ज्वल बनता है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला मुख्य आयुक्त मोहम्मद सादिक शेख ने की। विशिष्ट अतिथियों में जिला आयुक्त (गाइड) डा. फरहाना अली, छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल की संचालक मनोरा लकड़ा, अशासकीय विद्यालय प्रबंधन संघ के अध्यक्ष अक्षय दुबे, जिला प्रशिक्षण आयुक्त (गाइड) गनेशी सोनकर, तथा जिला संगठन आयुक्त (गाइड) उत्तरा मानिकपुरी उपस्थित रहे।
समापन एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह के मुख्य अतिथि नगर निरीक्षक दीपका प्रेमचंद साहू थे। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि स्काउट-गाइड जैसी गतिविधियाँ जीवन में अनुशासन और दृढ़ता विकसित करती हैं, जो भविष्य की हर सफलता की कुंजी हैं।
उत्सव का सफल संयोजन छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल के प्राचार्य एवं एएलटी लीडर एस.आर. अमित द्वारा किया गया। कार्यक्रम की लीडर ऑफ कोर्स नमिता श्यामकुंवर कड़वे थीं। कब मास्टर नोहर चंद्रा, राजकुमार वैष्णव, फ्लॉक लीडर सविता लता, आसमा कुरैशी सहित अन्य सहायकों ने शिविर संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रत्येक विद्यालय के प्राचार्य, प्रधानपाठक और प्रभारी शिक्षकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। दो दिनों तक चले इस उत्सव ने बच्चों में नई ऊर्जा, नया उत्साह और नई सीख भर दी, जो उनके व्यक्तित्व और भविष्य के लिए एक अमूल्य निधि साबित होगी।


















