
जांजगीर-चांपा, 08 नवम्बर
निराश्रित, घुमंतू एवं कृषिक पशुओं के संरक्षण और सुव्यवस्थित प्रबंधन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू की गई गौवंश पशु परिरक्षण अधिनियम अंतर्गत गोधाम योजना को जिले में प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने की, जिसमें जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय समिति के अध्यक्ष और सदस्य मौजूद रहे।
जिले में संचालित गौठानों को मजबूत और सक्षम बनाने तथा गोधामों के संचालन हेतु पंजीकृत गौशालाओं, स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों द्वारा पशुधन विकास विभाग में आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। बैठक में इन आवेदनों की समीक्षा और प्राथमिकता तय करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
कलेक्टर महोबे ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर प्राप्त सभी आवेदनों की समुचित एवं पारदर्शी जाँच की जाए ताकि गोधाम स्थापना का लाभ सही स्थानों पर मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में निराश्रित पशुओं की संख्या अधिक है या गौठान नेशनल हाइवे के निकट स्थित हैं, वहाँ गोधाम स्थापना को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इससे न केवल पशु संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावनाएँ भी कम होंगी।
उन्होंने विकासखंड समितियों से प्राप्त आवेदनों की शीघ्र अनुशंसा करने पर जोर दिया, ताकि जिला समिति द्वारा अंतिम अनुमोदन के बाद प्रस्तावों को समय पर छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजा जा सके।
बैठक में उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएँ जांजगीर ने अवगत कराया कि जिले में कुल 65 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 32 आवेदनों को विकासखंड स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित किया गया है।
बैठक में जिला एवं विकासखंड स्तर के सभी समिति सदस्य, अधिकारी एवं पशुधन विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह बैठक गोधाम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिससे जिले में गौवंश संरक्षण को नई गति एवं मजबूती मिलेगी।


















