
कबीरधाम जिला के पंडरिया विकासखंड के ग्राम मोहतरा कला में एक अद्भुत और प्रेरणादायी पहल शुरू हुई है। यहां की सरपंच श्रीमती वर्षा निलेश चंद्रवंशी द्वारा “अटल उद्यान” नाम से एक धार्मिक गार्डन का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है, जो पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह उद्यान न केवल गांव की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का केंद्र भी बनेगा।
इस “अटल उद्यान” का स्वरूप अत्यंत विशिष्ट और आकर्षक है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस उद्यान में प्रवेश करेगा, उसे रामलीला और कृष्णलीला के दृश्य, भगवद गीता के श्लोक, तथा भगवान शंकर, माता काली, श्री गणेश, सरस्वती माता, लक्ष्मी माता, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की सुंदर मूर्तियों का दिव्य संगम देखने को मिलेगा। यह दृश्य किसी मंदिर या धार्मिक मेले से कम नहीं होगा।
सबसे खास बात यह है कि इस उद्यान का पूरा खर्च सरपंच वर्षा निलेश चंद्रवंशी स्वयं वहन कर रही हैं। उनका कहना है कि “इस गार्डन के माध्यम से हमारा उद्देश्य गांव के लोगों को धर्म, संस्कृति और मानवता की भावना से जोड़ना है। जब गांव धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत होगा, तो उसकी सामाजिक एकता भी सुदृढ़ होगी।”
इस निर्माण कार्य में भोरमदेव आदिवासी चितेरे फाउंडेशन की टीम अहम भूमिका निभा रही है। फाउंडेशन के डारेक्टर एवं राष्ट्रीय पेंटिंग अवार्ड विजेता श्री बलबीर विश्वकर्मा, साथ में प्रभात विश्वकर्मा, कमलेश साहू, समेलाल वर्मा और राजकिशोर इस गार्डन में आकर्षक चित्रकारी कर रहे हैं। चितेरे फाउंडेशन की डारेक्टर ने कहा, “मैंने सैकड़ों गांवों में काम किया है, लेकिन ऐसा सरपंच पहली बार देखा है, जो अपने निजी खर्च से गांव के लिए इतना बड़ा धार्मिक पार्क बना रहा है। यह सचमुच अद्वितीय पहल है।”
गांव के निवासी भी इस पहल से बेहद उत्साहित हैं। ग्रामवासी महेश निर्मलकर ने कहा, “हमारे गांव में ऐसा कार्य पहली बार हो रहा है। सरपंच जी का यह प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है। यह गार्डन न केवल धार्मिक स्थल बनेगा, बल्कि बच्चों के लिए सीखने और बुजुर्गों के लिए शांति का स्थान भी होगा।”
“अटल उद्यान” के निर्माण से मोहतरा कला गांव में नई पहचान जुड़ने जा रही है। यह स्थल आने वाले समय में धार्मिक आस्था, कला, और ग्रामीण विकास का सुंदर संगम प्रस्तुत करेगा। ग्रामीणों के सहयोग और सरपंच वर्षा निलेश चंद्रवंशी के दूरदर्शी नेतृत्व से मोहतरा कला जल्द ही कबीरधाम जिले का एक “धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र” बन जाएगा।
यह पहल न केवल गांव के विकास की मिसाल है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अगर नीयत साफ हो और सोच समाज के लिए हो, तो छोटा गांव भी बड़े परिवर्तन की शुरुआत बन सकता है।


















