
रायपुर, 27 अक्टूबर 2025।
छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के अघरिया समाज के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आज सम्पन्न हुई, जिसमें समाज के अखिल भारतीय स्तर पर संगठनात्मक एकता और विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में दोनों राज्यों के प्रमुख पदाधिकारियों ने भाग लिया और समाज की एकजुटता, शिक्षा, युवाओं के मार्गदर्शन तथा सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए ठोस सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए पटेल ने बताया कि उड़ीसा राज्य की ओर से दुर्गा माधव पटेल, द्वारिका पटेल, डॉ. बिहारी लाल पटेल, दिलीप पटेल, सुशांतो पटेल शामिल हुए, वहीं छत्तीसगढ़ से फागुलाल पटेल, बिहारी लाल पटेल, भोजराम पटेल, राजेश नायक और छतर सिंह नायक उपस्थित रहे। इन सभी को मिलाकर एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया गया है, जो अब समाज के अखिल भारतीय प्रतिनिधि संगठन की दिशा तय करेगी।

पटेल ने जानकारी दी कि यह समिति शीघ्र ही छत्तीसगढ़ की केंद्रीय समिति एवं क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवियों से विचार-विमर्श कर एक प्रारूप मार्गदर्शक योजना तैयार करेगी। इस योजना को मार्गदर्शक मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके अवलोकन के पश्चात समन्वय समिति की एक विस्तारित बैठक आहुत की जाएगी। इसमें अखिल भारतीय अघरिया समाज के प्रतिनिधि संगठन को मूर्त रूप देने का औपचारिक निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अघरिया समाज की एकता और संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाना समय की मांग है। समाज की युवा पीढ़ी को शिक्षा, रोजगार, कृषि विकास और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में जोड़ने के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ सदस्य उमाशंकर पटेल, पुरुषोत्तम पटेल, अमर सिंह पटेल, संत कुमार, खेमराज पटेल, याद लाल नायक, कामता पटेल, जशवंत पटेल और प्यारी मोहन पटेल समेत दोनों राज्यों के प्रमुख जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने समाज में एकजुटता बनाए रखने और आगामी पीढ़ियों को समाज के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का संकल्प लिया।
बैठक का समापन केंद्रीय सचिव भोजराम पटेल द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक समन्वय बैठक ने अघरिया समाज को एक नई दिशा दी है। आने वाले समय में अखिल भारतीय प्रतिनिधि संगठन के माध्यम से समाज के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का कार्य किया जाएगा।
सभी सदस्यों ने यह भी निर्णय लिया कि समाज के प्रत्येक राज्य में “युवा प्रोत्साहन समिति” और “महिला सशक्तिकरण मंच” गठित किए जाएंगे, ताकि समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

बैठक में सौहार्द, एकता और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि – “अघरिया समाज की पहचान हमारी एकता है, और यही एकता हमें राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाएगी।”
इस ऐतिहासिक बैठक से अघरिया समाज की अखिल भारतीय एकता की नई नींव पड़ी है, जो आने वाले समय में समाज के विकास का नया अध्याय लिखेगी।




















