
27 अक्टूबर छठ महापर्व की पवित्रता, आस्था और उल्लास से आज पूरा शहर सराबोर है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए शाम होते ही प्रमुख छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी। व्रती महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों में सुसज्जित होकर गीत और भजन गाती हुई घाटों की ओर बढ़ीं। प्रशासन और नगर निगम द्वारा घाटों की विशेष सजावट ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया।
सुबह से ही व्रतधारी महिलाएं पूजा सामग्री—सूप, दऊरा, फल, गन्ना और ठेकुआ आदि—की तैयारी में जुटी रहीं। लोकगीतों की गूंज और आस्था की लहरों के बीच 36 घंटे के निर्जला उपवास पर रहकर व्रती आज डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी। मान्यता है कि सूर्य उपासना से परिवार में सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतति की रक्षा होती है।
घाटों की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। पुलिस बल की तैनाती, गोताखोरों की मौजूदगी और ड्रोन निगरानी के साथ प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। साथ ही घाटों पर बैरिकेडिंग, लाइटिंग, मेडिकल टीम और यातायात नियंत्रण के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित घाटों पर ही अर्घ्य दें और जलाशयों में गहराई तक जाने से बचें।
कल प्रातः सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह चार दिवसीय महापर्व संपन्न होगा। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रती पारण कर व्रत खोलेंगे और परिवार तथा समाज के कल्याण की मंगलकामनाएं करेंगे। आस्था, अनुशासन और प्रकृति-पूजन का अनोखा संगम छठ, एक बार फिर शहर को धार्मिक भावनाओं की एक डोर में पिरो रहा है।


















