
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जिले के 18 मजदूरों को कर्नाटक में बंधक बनाए जाने का आरोप लगा है। यह मजदूर बीजापुर के कड़ेनार (सिलगापारा) और कैका (गुमला) गांवों के रहने वाले हैं। परिजनों ने बीजापुर पुलिस को लिखित शिकायत देकर बताया कि मजदूरों को एक दलाल द्वारा धोखे से बाहर ले जाया गया और अब उनसे जबरन काम करवाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, बीजापुर जिले के 11 मजदूर कड़ेनार (सिलगापारा) से और 7 मजदूर कैका (गुमला) से 8 अगस्त 2025 को तेलंगाना के करीमनगर जिले में ईंट भट्टे पर काम के लिए रवाना हुए थे। वहां उन्होंने करीब एक सप्ताह तक काम किया। इसके बाद दलालों ने मजदूरों को महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के निजामाबाद में स्थानांतरित कर दिया। कुछ दिनों बाद दलाल सीनू श्रीनिवास नामक व्यक्ति ने मजदूरों को कर्नाटक के बिडगी गांव के जानमट्टी क्षेत्र में भेज दिया।
परिजनों का आरोप है कि कर्नाटक पहुंचने के बाद मजदूरों को बताया गया कि उन्हें एक सेठ के लिए 5 लाख रुपये में मजदूरी करनी है। इसके बाद से ही मजदूरों का अपने परिवार से संपर्क टूट गया है। बताया जा रहा है कि वहां उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है और उनसे जबरन मजदूरी करवाई जा रही है। साथ ही, अब तक उनकी मेहनताना राशि भी नहीं दी गई है।
परिजनों ने बीजापुर पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके परिजनों को सुरक्षित रिहा करवाया जाए और इस पूरे मानव तस्करी व बंधुआ मजदूरी प्रकरण में शामिल दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बीजापुर पुलिस ने मामले की शिकायत प्राप्त कर ली है और प्राथमिक जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया है और कहा कि इस तरह के मामलों से मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए और ऐसे दलालों पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
यह मामला एक बार फिर से ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी और दलालों की सक्रियता की समस्या को उजागर करता है, जहां रोज़गार की तलाश में मजदूर दूर राज्यों में जाकर शोषण का शिकार बन रहे हैं।


















