
बालोद, 10 अक्टूबर 2025।
राज्य शासन की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना के तहत अब इच्छुक संस्थाओं के लिए एक और अवसर प्रदान किया गया है। राज्य शासन ने गौधाम संचालन हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 15 अक्टूबर 2025 कर दी है। यह निर्णय उन संस्थाओं के हित में लिया गया है जो निर्धारित समयावधि में आवेदन प्रस्तुत नहीं कर सकीं थीं, ताकि अधिक से अधिक योग्य संस्थाएं इस योजना से जुड़ सकें।
गौधाम योजना का मुख्य उद्देश्य निराश्रित, घुमंतु एवं परित्यक्त गौवंश के संरक्षण, संवर्धन एवं देखभाल के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है। इस योजना के अंतर्गत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में गौधामों का संचालन किया जाएगा। इसमें इच्छुक स्वयंसेवी संस्थाएं (एनजीओ), ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां (FPO) तथा सहकारी समितियां भाग ले सकती हैं।
उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं बालोद ने जानकारी देते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत ऐसी शासकीय भूमि का चयन किया जाएगा, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशु शेड, पानी, बिजली तथा हरा चारा उत्पादन के लिए चारागाह की सुविधा उपलब्ध हो। इस प्रकार के उपयुक्त स्थलों की पहचान जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी, और राज्य गौसेवा आयोग की स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत चयनित संस्थाओं को गौधाम संचालन की अनुमति प्रदान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि पहले चरण में गौधामों की स्थापना प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में की जाएगी ताकि आवागमन करने वाले पशुओं के संरक्षण और देखरेख में आसानी हो सके। इसके अतिरिक्त, जिन क्षेत्रों में पहले से पंजीकृत गौशालाएं या समितियां सक्रिय हैं, यदि वे अपनी सहमति प्रदान करती हैं तो उनकी प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव को राज्य गौसेवा आयोग की क्रियान्वयन समिति द्वारा लिया जाएगा।
इस योजना के संचालन में गौसेवा, पशु नस्ल सुधार, चारा उत्पादन, एवं पशु संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन करने वाली संस्थाओं को निर्धारित प्रारूप में संपूर्ण दस्तावेजों सहित आवेदन पत्र 15 अक्टूबर 2025 तक संबंधित कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
आवेदन प्राप्त होने के पश्चात जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रस्तावों का परीक्षण किया जाएगा और योग्य संस्थाओं की सूची राज्य गौसेवा आयोग को अनुमोदन हेतु भेजी जाएगी। आयोग द्वारा स्वीकृति के बाद ही गौधाम की स्थापना की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
अंत में उप संचालक ने बताया कि यह योजना न केवल निराश्रित गौवंश की सुरक्षा में सहायक सिद्ध होगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, जैविक खाद उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने जिले की सभी पात्र संस्थाओं से समय पर आवेदन करने की अपील की है ताकि अधिक से अधिक क्षेत्र इस योजना के लाभ से जुड़ सकें और “गौसंवर्धन से ग्राम समृद्धि” के उद्देश्य को साकार किया जा सके।



















