
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक संगीत को नई पहचान दिलाने में युवा कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आ रही है। इसी कड़ी में उभरती लोकगायिका धारा सोनवानी का नया छत्तीसगढ़ी गीत मऊंहा के लाटा इन दिनों श्रोताओं के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है। गीत के रिलीज होने के महज तीन दिनों के भीतर ही इसे लगभग 1400 से अधिक दर्शकों ने देख लिया है और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा लगातार बढ़ रही है।

इस गीत में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू, गांव की सरल जीवनशैली और लोकपरंपरा की झलक साफ दिखाई देती है। मधुर संगीत और भावपूर्ण बोलों ने श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। खास बात यह है कि धारा सोनवानी की सुरीली और सरल आवाज ने गीत को और भी प्रभावशाली बना दिया है, जिससे श्रोता इसे बार-बार सुनना पसंद कर रहे हैं।
लोकसंगीत प्रेमियों का मानना है कि “महुआ के लटा” जैसे गीत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस गीत की सराहना करते हुए इसे अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा कर रहे हैं।
गायिका धारा सोनवानी का कहना है कि उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की परंपरा को आगे बढ़ाना और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना है। उनके इस प्रयास को श्रोताओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है, जो उनके लिए बड़ी प्रेरणा है।
लोकगायिका धारा सोनवानी की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर स्थानीय कलाकार भी कम समय में लोगों के दिलों में खास जगह बना सकते हैं। “महुआ के लटा” की बढ़ती लोकप्रियता छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत कर रही है।



















