
रायपुर (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) से जुड़े 560 क्लस्टर तकनीशियनों के लिए लंबे संघर्ष के बाद अब राहत की ठोस उम्मीद नजर आने लगी है। वर्षों से प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले इन तकनीशियनों की सेवाएं 1 अप्रैल 2026 से अचानक बंद कर दी गई थीं, जिससे उनके जीवन पर गहरा आर्थिक संकट छा गया था। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं—विभाग ने सेवा बहाली की प्रक्रिया तेज कर दी है और अप्रैल के अंत तक बड़ा फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
ये वही तकनीशियन हैं जिन्होंने जल, जमीन और जंगल से जुड़े योजनाओं के अंतर्गत सौर संयंत्रों के संचालन, रख-रखाव और मॉनिटरिंग का जिम्मा संभालते हुए ग्रामीण विकास की रीढ़ को मजबूती दी। सुदूर गांवों तक रोशनी पहुंचाने में इनकी भूमिका केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की कहानी भी रही है। बावजूद इसके, फंड की कमी और नए नियमों का हवाला देकर अचानक सेवाएं रोक देना न केवल प्रशासनिक निर्णय था, बल्कि सैकड़ों परिवारों के भविष्य पर सीधा असर डालने वाला कदम भी साबित हुआ।

अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए तकनीशियन 15 अप्रैल 2026 को रायपुर स्थित क्रेडा मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अध्यक्ष भूपेंद्र सवानी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश राणा और अधीक्षण अभियंता जगत नारायण बैगा से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखी। इस महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों ने तकनीशियनों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समाधान की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए।
इसी कड़ी में क्रेडा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र ने उम्मीदों को और मजबूत किया है। पत्र के अनुसार, सौर संयंत्रों के संचालन-संधारण और मॉनिटरिंग कार्य को व्यवस्थित करने के लिए “रुचि की अभिव्यक्ति” (EOI) प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह प्रक्रिया प्रधान कार्यालय स्तर पर संचालित हो रही है, जिससे पारदर्शिता और सुव्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, पूरी प्रक्रिया की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए 9 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया है, जिसे अप्रैल 2026 के अंत तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बैठक में यह सहमति बनी कि पूर्व में लागू किए गए त्रुटिपूर्ण नियमों को समाप्त कर तकनीशियनों को श्रम कानूनों के तहत नियमित प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। यदि यह निर्णय लागू होता है, तो तकनीशियनों को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सहित अन्य शासकीय लाभ मिल सकेंगे—जो अब तक उन्हें नहीं मिल पाए थे।

प्रदेश अध्यक्ष पंकज टिकरीहा ने कहा कि यह लड़ाई आज की नहीं, बल्कि कई वर्षों की है। जून 2024 की हड़ताल के दौरान भी विभाग ने आश्वासन दिया था, लेकिन अब जाकर वह जमीन पर उतरता दिख रहा है। उन्होंने कार्यपालन अभियंता संतोष कुमार ध्रुव की पहल को भी सराहा, जिनके प्रयासों से नोटशीट प्रक्रिया में तेजी आई है।
आज स्थिति यह है कि 560 तकनीशियनों और उनके परिवारों के बीच एक नई उम्मीद जन्म ले चुकी है। यह केवल नौकरी बहाली की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता की मांग है।
अब सभी की निगाहें अप्रैल के अंतिम सप्ताह पर टिकी हैं, जब क्रेडा की गवर्निंग बॉडी (GB) की बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। यदि फैसला तकनीशियनों के पक्ष में आता है, तो यह न केवल उनके लिए राहत होगी, बल्कि छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भी एक नई ऊर्जा का संचार करेगा।

560 क्लस्टर तकनीशियनों के लिए उम्मीद की बड़ी किरण: क्रेडा ने बढ़ाए बहाली के कदम, अप्रैल अंत तक ऐतिहासिक फैसला संभव">


















