
कोरबा / छत्तीसगढ़। देश के प्रमुख औद्योगिक जिले कोरबा से एक ऐसा भयावह हादसा सामने आया है, जिसने पूरे देश में औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एचटीपीपी के ग्राम झाबू स्थित राखड़ डेम के अचानक फूटने से राख का खतरनाक सैलाब बह निकला, जिसकी चपेट में आकर एक JCB ऑपरेटर जिंदा दफन हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, डेम में पहले से दबाव और तकनीकी खामियों के संकेत थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज किया। नतीजा — एक मजदूर की दर्दनाक मौत और पूरे सिस्टम की खुली पोल।

LIVE हादसा: कुछ सेकंड में ‘काम की जगह’ बनी कब्र
घटना के वक्त ऑपरेटर मशीन से काम कर रहा था। अचानक डेम का एक हिस्सा टूटा और राख का तेज बहाव दलदल बनकर फैल गया। ऑपरेटर को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह मशीन सहित राख में समा गया।
मौके पर मौजूद मजदूरों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन राख का दबाव इतना अधिक था कि कोई पास तक नहीं जा सका।
पहले से थी चेतावनी — फिर भी चुप क्यों रहा सिस्टम?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि:
डेम में दरार और रिसाव की शिकायत पहले भी हुई थी
सुरक्षा ऑडिट केवल कागजों में सीमित था प्रबंधन ने खतरे को नजरअंदाज किया
यानी यह हादसा नहीं, बल्कि ‘पूर्व चेतावनी के बावजूद हुई मौत’ है।
करोड़ों की इंडस्ट्री, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा शून्य
कोरबा देश का बड़ा पावर और औद्योगिक हब है, जहां हर साल हजारों करोड़ का उत्पादन होता है।
लेकिन जमीनी हकीकत:
सुरक्षा मानक कमजोर
निगरानी व्यवस्था लचर
प्रदूषण और खराब सड़कें पहले से जानलेवा
सवाल साफ है — क्या मुनाफे के आगे मजदूरों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?
जिम्मेदार कौन? अब तय होगा ‘कुर्सी बनाम जिम्मेदारी’
इस हादसे ने कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय करने की मांग खड़ी कर दी है:
एचटीपीपी प्रबंधन
सीएसईबी पश्चिम के अधिकारी
जिला प्रशासन
औद्योगिक सुरक्षा विभाग
क्या किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर एक मजदूर की मौत को ‘दुर्घटना’ बताकर मामला ठंडा कर दिया जाएगा?
स्थानीय से राष्ट्रीय गुस्सा — कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव है। मजदूरों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
अब मांग उठ रही है:
उच्च स्तरीय जांच
जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी
मृतक परिवार को उचित मुआवजा और न्याय
बड़ा सवाल देश से
आखिर कब तक औद्योगिक लापरवाही से मजदूर मरते रहेंगे?
क्या भारत में सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है?
और कब जवाबदेह होगा यह सिस्टम?
कोरबा का यह हादसा सिर्फ एक जिले की घटना नहीं, बल्कि पूरे देश की औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर लगा काला धब्बा है।
यह ‘एक हादसा’ नहीं —
बल्कि ‘लापरवाही से हुई मौत’ है, जिसका हिसाब अब देश मांग रहा है।

देश को हिला देने वाला हादसा! छत्तीसगढ़ के कोरबा में राख का ‘मौत का सैलाब’ — एचटीपीपी डेम फूटा, JCB ऑपरेटर जिंदा दफन">

















