
कोरबा, 07 अप्रैल 2026।
खरीफ 2026 फसल सीजन को ध्यान में रखते हुए कोरबा जिले में किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक की पर्याप्त एवं निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। शासन के निर्देश पर जिला तथा विकासखंड स्तर पर विशेष उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है, जो जिलेभर में कृषि इनपुट विक्रय केंद्रों का लगातार निरीक्षण कर रहा है। प्रशासन की इस सक्रियता का उद्देश्य किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना तथा बाजार में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी और अनियमितताओं पर रोक लगाना है।
जिला प्रशासन के निर्देश पर गठित यह दल उर्वरक, बीज और कीटनाशक की दुकानों का नियमित निरीक्षण कर रहा है। निरीक्षण के दौरान यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध बीज अधिनियम 1966, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उड़नदस्ता दल द्वारा विशेष रूप से उन मामलों की भी जांच की जा रही है, जिनमें रकबे से अधिक उर्वरक की खरीद की गई है। ऐसे मामलों में किसानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उर्वरक का उपयोग वास्तव में खेती के लिए ही हो रहा है। साथ ही उर्वरक की जमाखोरी, कालाबाजारी और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री की शिकायतों पर तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर और वितरण व्यवस्था की भी बारीकी से जांच की जा रही है। भौतिक स्टॉक और पीओएस मशीन में दर्ज एंट्री के बीच अंतर पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है, जिससे पूरे सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहे।
इसी कड़ी में 06 अप्रैल 2026 को पाली विकासखंड में उड़नदस्ता दल ने तीन उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान गंभीर अनियमितता पाए जाने पर उमेश खाद भंडार, पाली पर 21 दिनों का विक्रय प्रतिबंध लगाया गया। वहीं न्यू शिव खाद भंडार, पाली और द्वारिका प्रसाद जायसवाल, पाली को अनियमितताओं के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन विक्रेताओं की एक सप्ताह बाद पुनः जांच की जाएगी।
उप संचालक कृषि ने कहा कि यदि कोई उर्वरक विक्रेता वास्तविक किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने के बजाय पीओएस मशीन में फर्जी विक्रय दर्शाता है या भौतिक स्टॉक में अंतर पाया जाता है, तो उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही निर्धारित शासकीय दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने और कालाबाजारी करने वालों को भी किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।
जिला एवं ब्लॉक स्तर पर गठित उड़नदस्ता दल द्वारा लगातार निरीक्षण और कार्रवाई से जिले में कृषि सामग्री के वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित हो रहा है। प्रशासन ने किसानों से भी अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से निर्धारित दर पर ही बीज, उर्वरक और कीटनाशक खरीदें तथा पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें। इससे किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या होने पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।


















