
कोरबा, 15 अप्रैल 2026।
जिले में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और ऐतिहासिक ज्ञान को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” को लेकर कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर प्रशासनिक सक्रियता का स्पष्ट संदेश दिया। बैठक में जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति ने इस अभियान की गंभीरता और प्राथमिकता को दर्शाया।
कलेक्टर श्री दुदावत ने बैठक में स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपरा, इतिहास और ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि जिले में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान, संरक्षण और डिजिटलीकरण सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में एसडीएम कटघोरा श्री तन्मय खन्ना, सहायक कलेक्टर श्री क्षितिज गुरभेले, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्री तरुण कुमार किरण, सीईओ जिला पंचायत श्री दिनेश नाग एवं अपर कलेक्टर श्री देवेंद्र पटेल सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस अभियान को मिशन मोड में लेकर कार्य करें और समयसीमा के भीतर ठोस परिणाम सुनिश्चित करें।
कलेक्टर ने विशेष रूप से विद्यालयों, पुस्तकालयों, संग्रहालयों एवं निजी संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों की पहचान पर जोर देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण किया जाए, ताकि कोई भी महत्वपूर्ण पांडुलिपि छूट न सके। इसके लिए ग्राम एवं क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति कर जमीनी स्तर पर कार्य को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इसे गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि प्रशिक्षित टीम ही गुणवत्तापूर्ण और सटीक सर्वेक्षण कर सकती है, जिससे अभियान की सफलता सुनिश्चित होगी।
इसके साथ ही कलेक्टर ने पांडुलिपियों के जीआई टैगिंग, संरक्षण और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखना और आमजन तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के नेतृत्व में यह पहल जिले में सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाली साबित हो रही है। प्रशासन की सक्रियता और प्रतिबद्धता से यह उम्मीद की जा रही है कि कोरबा जिले की ऐतिहासिक विरासत को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि उसे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान भी दिलाई जाएगी।



















