
कोरबा, 27 मार्च 2026/
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विकासखंड करतला के ग्राम उमरेली स्थित जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति मर्यादित आज सफलता की नई इबारत लिख रही है। सीमित संसाधनों और छोटे-छोटे तालाबों के समुचित उपयोग से समिति ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना, मेहनत और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण क्षेत्र में भी समृद्धि हासिल की जा सकती है।
समिति ने ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले सिंघरी तालाब, पुरैनहा तालाब, घेसरा डबरी और डबरी तालाब, जिनका कुल रकबा 8.972 हेक्टेयर है, को 10 वर्षों के लिए लीज पर लेकर व्यवस्थित रूप से मत्स्य पालन का कार्य प्रारंभ किया। यह पहल न केवल आजीविका का सशक्त माध्यम बनी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का स्थायी स्रोत भी साबित हो रही है।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा समिति को 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य बीज अंगुलिका, मछली पकड़ने के लिए जाल और मत्स्य विक्रय हेतु आइस बॉक्स उपलब्ध कराए गए। इन संसाधनों ने समिति की कार्यक्षमता को बढ़ाया और उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। समिति की कार्यप्रणाली की खास बात यह है कि वे हर तालाब का उपयोग उसकी उपयोगिता के अनुसार कर रहे हैं—एक तालाब को नर्सरी के रूप में विकसित किया गया है, जबकि अन्य तालाबों में विविध प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है।
यहां कतला, रोहू, मृगल, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, चिताला, पंगास और रूपचंद जैसी विभिन्न प्रजातियों का वैज्ञानिक पद्धति से पालन किया जा रहा है, जिससे उत्पादन में विविधता और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
समिति के सदस्य स्वयं मछली पकड़ने से लेकर बाजार में विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वे सीधे हाट-बाजार में मछलियों की बिक्री करते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है और उन्हें उचित मूल्य प्राप्त होता है। इसी का परिणाम है कि समिति को वर्तमान में प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रुपये से अधिक की आय हो रही है, जिससे सभी 25 सदस्य आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।
यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि पंचायत स्तर पर उपलब्ध छोटे जलस्रोतों का वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए, तो ग्रामीणों को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका मिल सकती है। जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति आज शासन की सहकार से समृद्धि की अवधारणा को साकार करते हुए अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
यह सफलता न केवल समिति की मेहनत का परिणाम है, बल्कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का भी सशक्त उदाहरण है, जो “छोटे तालाब, बड़ी समृद्धि” के संदेश को साकार रूप दे रहा है।

छोटे तालाबों से बड़ी सफलता की कहानी: जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति बनी ग्रामीण समृद्धि का प्रेरक मॉडल">




















