
कोरबा, 19 मार्च 2026।
जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जटगा के आश्रित ग्राम बांधापारा में रहने वाली अनिता बाई की जिंदगी अब संघर्ष से उम्मीद की ओर बढ़ चुकी है। कभी परिवार का खर्च चलाना जहां बेहद मुश्किल था, वहीं आज सरकारी योजनाओं के सहारे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
संघर्ष से शुरुआत, जंगल बना सहारा
तीन बच्चों की मां अनिता बाई के लिए एक समय ऐसा था जब महीने में एक हजार रुपये जुटाना भी चुनौती बन जाता था। गांव में रोजगार के सीमित अवसर होने के कारण वह जंगल से चरोटा बीज और अन्य वनोपज इकट्ठा कर बाजार में बेचती थीं। चरोटा बीज लगभग 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है, जिससे किसी तरह घर का खर्च चलता था।

महतारी वंदन योजना बनी सहारा
छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना से जुड़ने के बाद अनिता बाई के जीवन में बड़ा बदलाव आया। योजना के तहत मिलने वाली प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि उनके लिए आर्थिक संबल बन गई है।
अब घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना पहले जितना कठिन नहीं रहा। अनिता बाई मुस्कुराते हुए बताती हैं कि—
“अब घर चलाना पहले जैसा मुश्किल नहीं रहा, यह योजना हमारे लिए बहुत बड़ी मदद है।”
मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
अनिता बाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि यह योजना महिलाओं के लिए सच्चा सहारा बनकर आई है। इससे उन्हें न केवल आर्थिक मदद मिली, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
परिवार में आई आर्थिक राहत
अनिता बाई के पति राम सिंह भी इस बदलाव को महसूस करते हैं। उनका कहना है कि अब घर की छोटी जरूरतों के लिए अलग से पैसे की चिंता नहीं रहती, जिससे परिवार में आर्थिक तनाव कम हुआ है।
अब मिलेगा पक्का घर, सपनों को मिली उड़ान
खुशी की बात यह है कि परिवार का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी स्वीकृत हो चुका है और निर्माण कार्य जारी है। जल्द ही उन्हें अपना पक्का और सुरक्षित घर मिलने वाला है, जो उनके जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक बनेगा।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
वनोपज संग्रह, चरोटा बिक्री और सरकारी योजनाओं के सहयोग से अनिता बाई अब अपने परिवार को बेहतर भविष्य देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
महतारी वंदन योजना ने न सिर्फ उनके जीवन को आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह भी दिखाई है।
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महतारी वंदन योजना से बदली जिंदगी, अनिता बाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल">



















