
रायपुर, 20 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक सरोकारों में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को लेकर पूरे राज्य में जोरदार समर्थन उभरकर सामने आया। सोशल मीडिया पर #धर्मरक्षा_छत्तीसगढ़ ट्रेंड करते हुए सीधे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लाई गई इस पहल को “सुशासन का सशक्त निर्णय” बताया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जबरन, प्रलोभन या छल-कपट से धर्मांतरण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सोशल मीडिया से सड़क तक दिखा असर
प्रदेश के कोने-कोने से युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया विभाग द्वारा शुरू किया गया यह अभियान कुछ ही घंटों में व्यापक जनसमर्थन में बदल गया।
फेसबुक, X (ट्विटर), इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर हजारों पोस्ट के जरिए लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की।
क्या कहता है विधेयक
इस प्रस्तावित कानून में—
- जबरन, दबाव या प्रलोभन से धर्मांतरण को अपराध माना जाएगा
- दोषियों के लिए सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान
- जांच के लिए सक्षम प्राधिकरण की व्यवस्था
- पीड़ितों को न्याय दिलाने हेतु विशेष प्रक्रिया
केंद्र तक पहुंची गूंज
प्रदेश में उठी यह आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बन चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।
समर्थन और बहस दोनों तेज
जहां एक ओर समर्थक इसे “धर्म और आस्था की सुरक्षा का ऐतिहासिक कदम” बता रहे हैं, वहीं विपक्ष और कुछ संगठनों द्वारा इस पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। लेकिन आमजन के बीच इस मुद्दे पर जागरूकता और भागीदारी स्पष्ट रूप से बढ़ी है।
जनभावना का संदेश
प्रदेश की जनता ने साफ संकेत दिया है कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी प्रकार की जबरदस्ती स्वीकार नहीं होगी।
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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर कड़ा प्रहार, धर्मरक्षा_छत्तीसगढ़ से गूंजा प्रदेश – केंद्र तक पहुंची आवाज">



















