
रायगढ़, 16 फरवरी 2026
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़, सुलभ और संवेदनशील बनाने की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और प्रेरणादायक परिणाम रायगढ़ में देखने को मिला। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सकों ने अपनी तत्परता, विशेषज्ञता और समन्वित टीमवर्क से एक अत्यंत गंभीर स्थिति में फंसी 23 वर्षीय गर्भवती महिला की जान बचाकर मानवता और चिकित्सा विज्ञान का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 वर्षीय प्रथम गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान प्री-एक्लेम्पसिया (अत्यधिक उच्च रक्तचाप) की गंभीर समस्या थी। 2 फरवरी 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे महिला को अत्यंत नाजुक हालत में एक निजी अस्पताल से रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आपातकालीन विभाग में रेफर किया गया। उस समय मरीज का रक्तचाप अत्यधिक बढ़ा हुआ था तथा उन्हें सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो रही थी।
चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान महिला में पल्मोनरी एडीमा (फेफड़ों में पानी भरना) की पुष्टि हुई, जो एक जानलेवा स्थिति मानी जाती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए आपातकालीन सिजेरियन सेक्शन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन की प्रक्रिया के दौरान अचानक मरीज को पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट हो गया, जिससे स्थिति और भी नाजुक हो गई।
इस संकट की घड़ी में अस्पताल की चिकित्सकीय टीम ने अद्भुत सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एम. लकड़ा के नेतृत्व में टीम ने तुरंत उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर शुरू की। चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और ऑपरेशन थिएटर टीम के समन्वित प्रयासों से मरीज की हृदयगति पुनः बहाल की गई। इसके बाद मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर आईसीयू में भर्ती कर पोस्ट-कार्डियक अरेस्ट प्रोटोकॉल के तहत गहन निगरानी और उपचार दिया गया।
लगभग तीन दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार होने लगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सतत निगरानी में धीरे-धीरे वेंटिलेटर हटाया गया और 12 फरवरी 2026 को मरीज को आईसीयू से सामान्य वार्ड में स्थानांतरित किया गया। सफल उपचार के बाद अब महिला पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुकी हैं।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम.के. मिंज ने इस सफलता को समय पर पहचान, त्वरित निर्णय, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाओं और बहु-विषयक टीमवर्क का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध हों, तो अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में भी जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है।
इस जटिल और जीवनरक्षक प्रक्रिया में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मसीह लकड़ा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. टी.के. साहू, डॉ. चंद्रभानु पैंकरा, डॉ. अशोक सिंह सिदार, डॉ. लेश पटेल, डॉ. अनीश, डॉ. लक्ष्मी यादव, डॉ. अमित भोई, डॉ. सुभाष राज सहित ऑपरेशन थिएटर और नर्सिंग स्टाफ का उल्लेखनीय योगदान रहा।
यह सफलता न केवल रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल की उत्कृष्ट चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश में सुदृढ़ होती सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर आमजन के विश्वास को भी और मजबूत करती है।















