
कोरबा/छत्तीसगढ़। कोरबा जिले में अनुकम्पा नियुक्ति से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग के आवेदकों को भू-अभिलेख शाखा कोरबा में पटवारी पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गई, जबकि शिक्षा विभाग में पद रिक्त होने का दावा किया गया है।
क्या है शिकायत?
शिकायतकर्ता के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, मंत्रालय रायपुर के पत्र दिनांक 15/04/2024 का हवाला देते हुए भू-अभिलेख शाखा कोरबा द्वारा 06/01/2025 के पत्र के माध्यम से 9 आवेदकों को पटवारी पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई।
आरोप है कि यह नियुक्ति इस आधार पर दी गई कि शिक्षा विभाग में पद रिक्त नहीं हैं। जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में शिक्षा विभाग में 772 शिक्षक पद रिक्त थे।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि विभागीय स्तर पर जिला प्रशासन को पद रिक्त नहीं होने की जानकारी दी गई, जिसके आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी। शिकायतकर्ता ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन से पारदर्शी जांच की अपेक्षा
अनुकम्पा नियुक्ति जैसे संवेदनशील विषय में पारदर्शिता और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में तथ्यात्मक आधार पाया जाता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाएगी।
हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कलेक्टर की सख्त छवि के बीच मामला चर्चा में
कोरबा जिला प्रशासन की सख्त और स्वच्छ छवि के बीच इस प्रकार की शिकायत सामने आना कई प्रश्न खड़े कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड और तथ्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है, तो सच्चाई शीघ्र सामने आ सकती है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
क्या नियमों के अनुरूप नियुक्ति हुई या कहीं प्रक्रियागत त्रुटि हुई?
क्या जांच के बाद जिम्मेदारी तय होगी?
जनहित और पारदर्शिता की दृष्टि से इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
फिलहाल मामला शिकायत और जांच की मांग तक सीमित है — अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा।















