
कोरबा/छत्तीसगढ़। ग्राम रिसदा की भूमि से जुड़ा मामला अब गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बनता जा रहा है। 09 फरवरी 2026 को कलेक्टर कोरबा सहित प्रदेश के उच्च अधिकारियों को भेजे गए एक विस्तृत शिकायत पत्र में भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को) से संबंधित खसरा क्रमांक 15000, 15001 एवं 15002 के रकबे को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 1971-72 में निजी एवं शासकीय भूमि का अर्जन किया गया था, जिसका कुल रकबा लगभग 58.148 हेक्टेयर (145.37 एकड़) बताया गया है। साथ ही 07 फरवरी 2014 के आदेशानुसार लगभग 1.892 हेक्टेयर शासकीय भूमि पट्टे पर दिए जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है।
आवेदन में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 2019-20 में तहसीलदार न्यायालय के आदेशानुसार पुराने खसरा नंबरों को समेकित कर नए खसरा नंबर 15000, 15001 एवं 15002 बनाए गए। वर्तमान राजस्व अभिलेख में खसरा नंबर 15002 का रकबा 106.495 हेक्टेयर दर्ज होने पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए हैं?
आवेदन में दावा किया गया है कि दर्ज रकबे में वृद्धि की प्रविष्टि की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की त्रुटि, लिपिकीय गलती या प्रक्रियागत चूक पाई जाए तो उसे दुरुस्त किया जाए तथा संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि अभिलेखों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए और वास्तविक अर्जित भूमि तथा दर्ज रकबे का मिलान कराया जाए।
प्रशासन से पारदर्शिता की अपेक्षा
भूमि जैसे संवेदनशील विषय पर उठे प्रश्नों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड में कोई विसंगति है तो उसका शीघ्र निराकरण आवश्यक है, ताकि जनहित और शासकीय भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक संबंधित कंपनी या विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं
- क्या 106.495 हेक्टेयर की प्रविष्टि रिकॉर्ड में सही है?
- क्या यह मात्र लिपिकीय त्रुटि है या प्रक्रिया की समीक्षा आवश्यक है?
- क्या राजस्व अभिलेखों का पुनः सत्यापन किया जाएगा?
अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। स्पष्ट है कि शिकायत के आधार पर उठे इन प्रश्नों का समाधान तथ्यों और दस्तावेज़ों की जांच से ही संभव है।

फिलहाल मामला शिकायत और जांच की मांग तक सीमित है — अंतिम निष्कर्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।















