
कोरबा | करतला विकासखंड
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों के हित में लागू की गई पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था को जमीनी स्तर पर कमजोर किए जाने के आरोप कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत धान उपार्जन केंद्र चिकनीपाली से लगातार सामने आ रहे हैं। कलेक्टर महोदय द्वारा एक सप्ताह पूर्व की गई सख्त कार्रवाई के बावजूद यहां व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है, जिससे ग्रामीण किसानों में असंतोष व्याप्त है।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार धान खरीदी प्रक्रिया में मानक तौल से अधिक प्रति बोरा 40 किलो 900 ग्राम धान लिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इस अतिरिक्त तौल से उनकी मेहनत की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है। भोले-भाले ग्रामीण किसान अपनी उपज बेचने के लिए केंद्र पर निर्भर हैं और मजबूरी में वे इस स्थिति को सहन करने को विवश हैं।

इन्हीं आरोपों के बीच ऑपरेटर कौशलेंद्र जायसवाल की भूमिका भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार उनकी मूल पदस्थापना तिलकेजा धान उपार्जन केंद्र में बताई जा रही है, लेकिन वे वहां नियमित रूप से कार्यभार नहीं संभालते। इसके विपरीत, वे चिकनीपाली धान उपार्जन केंद्र में सक्रिय रहते हुए स्वयं को पद प्रभारी बताने लगे, जिससे जिम्मेदारी और अधिकार को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि संबंधित ऑपरेटर द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी पारदर्शिता और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही आरोप है कि धान खरीदी के दौरान हमाली एवं अन्य कार्य भी किसानों से ही कराए जा रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार इसकी अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
गौरतलब है कि हाल ही में जिले के कलेक्टर महोदय ने चिकनीपाली धान उपार्जन केंद्र में कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारने का स्पष्ट संदेश दिया था। यह कार्रवाई शासन की किसान-हितैषी मंशा को दर्शाती है। बावजूद इसके यदि अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह निरंतर निगरानी और पुनः जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
किसानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि धान खरीदी की तौल प्रक्रिया, कर्मचारियों की तैनाती, ऑपरेटर की भूमिका और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि भोले-भाले ग्रामीण किसानों को उनका पूरा हक मिल सके और शासन की नीति का लाभ वास्तविक रूप से उन तक पहुंचे।




















