
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (नवा रायपुर) में आयोजित कलेक्टर कॉन्फ्रेंस 2025 में कोरबा जिले के कलेक्टर अजीत वसंत ने अपने काम से सबका ध्यान खींच लिया। सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने खुले मंच से कोरबा जिले की प्रशंसा करते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना” के क्रियान्वयन में कोरबा ने जो उदाहरण पेश किया है, वह पूरे राज्य के लिए प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरबा जिले ने जिस तरह से सूर्यघर योजना को खनिज न्यास (DMF) के सहयोग से ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में लागू किया है, वह नवाचारपूर्ण सोच और संवेदनशील प्रशासन का उत्तम उदाहरण है। दूरस्थ बैगा और कोरवा समुदाय के गांवों में सौर ऊर्जा के माध्यम से न केवल अंधकार मिटा है, बल्कि लोगों के जीवन में नई रोशनी आई है। बिजली बिल का बोझ कम होने से ग्रामीणों को आर्थिक राहत मिली है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा है।
कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत बनाए जा रहे घरों की छतों पर प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के अंतर्गत सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। इस एकीकृत मॉडल से ग्रामीण परिवारों को 300 यूनिट तक की मुफ़्त बिजली मिल रही है। इससे न केवल घरों में उजाला हुआ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कोरबा जिले का यह प्रयास “वन डिस्ट्रिक्ट, वन इनोवेशन” की भावना को साकार करता है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे अपने जिलों में भी इसी तरह की योजनाओं में नवाचार लाएं और स्थानीय जरूरतों के अनुसार मॉडल तैयार करें। मुख्यमंत्री ने कहा — “ऐसे कार्य राज्य के विकास की दिशा तय करते हैं। प्रशासन तब ही सशक्त बनता है जब वह जनता के जीवन में सीधा परिवर्तन लाता है।”
सम्मेलन में मौजूद अधिकारियों ने भी कोरबा मॉडल की सराहना की। यह मॉडल इस बात का उदाहरण बन गया है कि अगर इच्छाशक्ति और दूरदृष्टि हो तो सरकारी योजनाएँ केवल कागजों पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर भी चमक बिखेर सकती हैं।
वास्तव में, कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत ने यह साबित कर दिया है कि कलेक्टर ऐसा हो जो सिर्फ़ आदेश न दे, बल्कि उदाहरण बने; जो योजनाएँ न गिनाए, बल्कि असर दिखाए। आज कोरबा में रोशनी सिर्फ़ सोलर पैनल से नहीं, बल्कि प्रशासन की ईमानदार सोच से भी फैली है। मुख्यमंत्री की सराहना और जनता की खुशी — दोनों यह कहने को मजबूर हैं:
कलेक्टर ऐसा हो, जो ख़बर बने, और ख़बर भी प्रेरणा की




















