
कोरबा, 08 अप्रैल 2026।
सीमित संसाधनों और जिम्मेदारियों से भरे जीवन में भी यदि हौसले बुलंद हों तो सफलता की नई राहें खुल ही जाती हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है कटघोरा विकासखंड के ग्राम धंवईपुर नवापारा की निवासी श्रीमती सुरेखा जायसवाल ने, जिन्होंने संघर्षों को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज वे “लखपति दीदी” के रूप में पहचानी जा रही हैं और ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
प्रदेश में महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से हजारों महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं
श्रीमती सुरेखा जायसवाल ने केवल दसवीं कक्षा तक ही शिक्षा प्राप्त की है। पहले वे एक सामान्य गृहिणी के रूप में घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही थीं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनके पति पर ही थी। हालांकि उनके मन में भी अपने परिवार की आय बढ़ाने और आर्थिक सहयोग देने की इच्छा हमेशा बनी रही।
वर्ष 2019 में उनका जुड़ाव बिहान योजना छत्तीसगढ़ से हुआ, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। आस्था महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आत्मविश्वास मिला बल्कि आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर भी प्राप्त हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें आरएफ मद से 10 हजार रुपये, सीआईएफ मद से 30 हजार रुपये तथा ‘स्वयं सिद्धा’ पहल के अंतर्गत 2 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी दिए गए, जिससे उन्होंने छोटे व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित करना सीखा।
इसके बाद एफएलसीआरपी योजना के माध्यम से बैंक से 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर उन्होंने श्रृंगार सामग्री की दुकान, किराना दुकान और फोटोकॉपी सेंटर की शुरुआत की। मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि धीरे-धीरे उनका व्यवसाय बढ़ता गया और आज उनकी वार्षिक आय लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इसी उपलब्धि के कारण आज वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
आज सुरेखा जायसवाल न केवल अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रही हैं, बल्कि घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी उनकी अहम भूमिका है। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है, जो अब आत्मनिर्भर बनने के लिए आगे आ रही हैं।
श्रीमती सुरेखा जायसवाल ने अपनी इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ शासन और बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के सहयोग और स्व-सहायता समूह के समर्थन से ही वे आज “लखपति दीदी” बन पाई हैं और सम्मान के साथ अपने परिवार का जीवन संवार रही हैं।




















