
कोरबा, 21 मार्च 2026 — शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के मनोभावों और सहज विकास की एक संवेदनशील यात्रा है। इसी सोच को साकार करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा ने 4 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए “बाल मैत्री कार्यक्रम” की सराहनीय शुरुआत की है। यह पहल आंगनबाड़ी के स्नेहिल और खेल-आधारित वातावरण से प्राथमिक शाला के अनुशासित ढांचे तक बच्चों के संक्रमण को सरल, सहज और आनंदमय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
20 मार्च से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम के तहत उन बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जो प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश की दहलीज पर हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह “मासिक शाला भ्रमण” का आयोजन किया जाएगा, जहां नन्हे बच्चे नजदीकी विद्यालयों का दौरा कर वहां के वातावरण, कक्षाओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों से परिचित होंगे। यह अनुभव उनके भीतर विद्यालय के प्रति अपनत्व और आत्मविश्वास का संचार करेगा।
कार्यक्रम की विशेषता यह है कि इसमें सीखने को बोझ नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम बनाया गया है। समूह खेल, बालगीत, कहानी, रचनात्मक गतिविधियां और कक्षा-01 के बच्चों के साथ संयुक्त सहभागिता जैसे प्रयास बच्चों को स्वाभाविक रूप से विद्यालयीन माहौल के अनुरूप ढालने में सहायक होंगे।
यह सर्वविदित है कि आंगनबाड़ी के मुक्त और खेलपूर्ण परिवेश से सीधे विद्यालय के औपचारिक वातावरण में आने पर कई बच्चों को असहजता का अनुभव होता है, जो उनकी सीखने की रुचि को प्रभावित कर सकता है। “बाल मैत्री कार्यक्रम” इस अंतर को पाटने का संवेदनशील प्रयास है, जो न केवल बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता और सहभागिता को भी सुदृढ़ करेगा।
निस्संदेह, यह पहल प्रारंभिक शिक्षा को अधिक समावेशी, प्रभावी और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यदि इस तरह की योजनाएं निरंतर और व्यापक रूप से लागू होती रहें, तो शिक्षा का प्रथम कदम ही बच्चों के लिए उत्साह और आत्मविश्वास से भरा अनुभव बन सकता है।

नन्हे कदमों को मिला संबल: ‘बाल मैत्री कार्यक्रम’ से स्कूल का सफर हुआ आसान”">



















