
सक्ति/छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग से एक चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने विभागीय पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विकासखंड डभरा, जिला सक्ति के अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल सुखापाली एवं शासकीय हाई स्कूल सिंघीतराई में पदस्थ दो शिक्षकों—रामसुन्दर बियार और रामचन्द्र बियार—पर फर्जी विश्वविद्यालय अंकसूची के आधार पर नौकरी हासिल करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
सूत्रों एवं सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, इन दोनों शिक्षकों द्वारा नियुक्ति के समय जो विश्वविद्यालयीय अंकसूचियाँ जमा की गई थीं, वे फर्जी पाई गई हैं। इस पूरे मामले की शिकायत RTI कार्यकर्ता जितेन्द्र कुमार साहू द्वारा उच्च अधिकारियों से की गई थी।
जांच हुई, लेकिन सच्चाई दबाने का आरोप
शिकायत पर उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, सक्ति द्वारा दिनांक 11/06/2024 को शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कटकोनी के प्राचार्य प्यारे लाल साहू को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
लेकिन आरोप है कि जांच अधिकारी ने दिनांक 01/07/2024 को दोनों शिक्षकों से सांठगांठ कर उन्हें बचाने वाला जांच प्रतिवेदन तैयार कर दिया, जिसके आधार पर शिकायत को निराधार मानते हुए समाप्त कर दिया गया।
जब यह जानकारी शिकायतकर्ता को हुई, तो जांच अधिकारी और दोनों शिक्षकों के खिलाफ दोबारा उच्च अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई गई है।
रामसुन्दर बियार पर क्या हैं आरोप
RTI दस्तावेजों के अनुसार, शिक्षक रामसुन्दर बियार ने नियुक्ति के समय—
- गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर (2011) से B.Sc अंतिम वर्ष
- बिलासपुर विश्वविद्यालय (2014) से M.Sc (वनस्पति शास्त्र) अंतिम वर्ष
की अंकसूचियाँ प्रस्तुत की थीं।
इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनका नाम चयनित मेरिट सूची में शामिल कर नियुक्ति दी गई।
लेकिन RTI से सामने आया कि ये दोनों अंकसूचियाँ पूरी तरह फर्जी हैं। आरोप है कि बाद में अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच व धनबल के दम पर उन्होंने अपने सेवा पुस्तिका में हेराफेरी कर—
- विलियम कैरी यूनिवर्सिटी, शिलांग (मेघालय) से B.Sc अंतिम वर्ष 2012
- मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर (मुक्त एवं दूरवर्ती शिक्षा कार्यक्रम) से M.Sc अंतिम वर्ष 2014
के दस्तावेज शामिल करवा दिए।
रामचन्द्र बियार का मामला भी गंभीर
इसी प्रकार शासकीय हाई स्कूल सिंघीतराई में पदस्थ शिक्षक रामचन्द्र बियार पर भी आरोप है कि उन्होंने नियुक्ति के समय—
- बिलासपुर विश्वविद्यालय (2014) से M.A अंतिम वर्ष (अंग्रेजी)
की फर्जी अंकसूची जमा की।
RTI में प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाद में सेवा पुस्तिका में हेराफेरी कर मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर (मुक्त एवं दूरवर्ती शिक्षा) का अंकपत्र जोड़ दिया गया, जबकि नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं।
सवाल सिर्फ शिक्षकों का नहीं, सिस्टम का है
यह मामला सिर्फ दो शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि—
- फर्जी दस्तावेजों की जांच नियुक्ति के समय क्यों नहीं हुई?
- जांच अधिकारी ने किन आधारों पर आरोपों को निराधार बताया?
- क्या शिक्षा विभाग में प्रभाव और दबाव के आगे नियम बौने हो गए हैं?
अब निगाहें उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
RTI ने एक बार फिर साबित किया है कि सवाल पूछने से ही सच्चाई बाहर आती है।
अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा प्रकरण साबित हो सकता है।




















