
शासकीय पशु चिकित्सक पर गंभीर आरोप, कलेक्टर से की गई शिकायत
कोरबा (आधार स्तम्भ)।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पशुपालकों और आम नागरिकों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच कोरबा जिले से सामने आया यह मामला सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मुड़ापार क्षेत्र निवासी प्रमोद कुमार गुप्ता ने एक शासकीय पशु चिकित्सक पर इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलने और लापरवाहीपूर्ण उपचार के कारण उनके पालतू कुत्ते की मौत का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रमोद कुमार के अनुसार उनके लैब्राडोर नस्ल के कुत्ते की तबीयत 16 जनवरी को अचानक बिगड़ गई थी। इस पर उन्होंने शासकीय पशु चिकित्सक रामचरण साहू से संपर्क किया। आरोप है कि चिकित्सक ने घर पर इलाज कर पूरी तरह ठीक करने का भरोसा दिलाया और अलग-अलग माध्यमों से लगभग 35 हजार 500 रुपये वसूल लिए। इसके बावजूद न तो किसी प्रकार की आवश्यक जांच कराई गई और न ही विशेषज्ञ परामर्श लिया गया।
पीड़ित का कहना है कि इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाने के बाद भी कुत्ते की हालत लगातार बिगड़ती गई। समय रहते सही और वैज्ञानिक इलाज नहीं मिलने के कारण 23 जनवरी की रात कुत्ते की मौत हो गई। इस घटना से न केवल परिवार को मानसिक आघात पहुंचा, बल्कि सरकारी सेवाओं पर भरोसा भी डगमगा गया।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि शासकीय सेवा में रहते हुए निजी इलाज और भारी वसूली किस नियम के तहत की गई? क्या आम नागरिकों की मजबूरी का लाभ उठाकर सरकारी पद का दुरुपयोग किया जा रहा है? यह मामला केवल एक पालतू जानवर की मौत का नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक बनकर सामने आया है।
प्रमोद कुमार गुप्ता ने पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला कलेक्टर कोरबा एवं उपसंचालक पशु चिकित्सा विभाग को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच, वसूली गई राशि की पड़ताल और दोष सिद्ध होने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—क्या इस मामले में समय रहते कार्रवाई होगी या फिर यह शिकायत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
यदि सख्ती नहीं हुई, तो जनता का सरकारी चिकित्सा व्यवस्था से भरोसा और कमजोर होना तय है।





















