
कोरबा 27 जनवरी 20/26
कोरोना महामारी की कठिन और अंधकारमय घड़ी में जब पथ विक्रेताओं की रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो गई थी, तब प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना उनके जीवन में उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर सामने आई। महामारी के दौरान बंद पड़े छोटे व्यवसायों को इस योजना ने न केवल दोबारा खड़ा किया, बल्कि हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता की ओर लौटने का संबल भी दिया। कोरबा जिले के जयकुमार देवांगन, सुषमा यादव, रामरूप पाण्डेय और सावित्री टंडन जैसे सैकड़ों पथ विक्रेताओं के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं साबित हुई।
लॉकडाउन के दौर में रेहड़ी, ठेला और फुटपाथ पर छोटे कारोबार करने वाले लोगों की आजीविका पर सबसे गहरा असर पड़ा। दिनभर की मेहनत से जो थोड़ी-बहुत आमदनी होती थी, वही परिवार के भरण-पोषण का सहारा थी। लेकिन अचानक लगे लॉकडाउन ने इन घरों के चूल्हे बुझा दिए। आमदनी शून्य हो गई और भविष्य को लेकर गहरी चिंता ने पूरे परिवार को घेर लिया।

ऐसे संकट के समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार द्वारा 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की शुरुआत की गई। योजना का उद्देश्य पथ विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के छोटे ऋण उपलब्ध कराकर उनका आत्मविश्वास लौटाना और उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करना था। 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रुपये तक के ऋण ने उन व्यवसायों में फिर से जान डाल दी, जो महामारी के कारण लगभग समाप्त हो चुके थे।
कोरबा नगर निगम क्षेत्र में इस योजना का प्रभाव बेहद सकारात्मक रूप में सामने आया है। जिला शहरी विकास अभिकरण के मिशन मैनेजर श्री मनीष भोई के अनुसार अब तक 9079 हितग्राहियों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है, जिनमें से 8655 पथ विक्रेताओं को राशि का वितरण भी कर दिया गया है। इन ऋणों से पथ विक्रेताओं ने अपने व्यवसाय दोबारा शुरू किए और आज वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं।
पोडीबहार वार्ड क्रमांक 32 के निवासी जयकुमार देवांगन मसाले बेचने का पारंपरिक कार्य करते थे। महामारी में उनका व्यवसाय बंद हो गया था, लेकिन स्वनिधि योजना से मिले 10 हजार रुपये ने उन्हें नई शुरुआत दी। समय पर ऋण चुकाकर उन्होंने 20 हजार रुपये का दूसरा ऋण भी प्राप्त किया और अब 50 हजार रुपये के ऋण की प्रक्रिया में हैं।

इसी तरह बालको के पाड़ीमार भदरापारा वार्ड क्रमांक 40 की सुषमा यादव सिलाई का कार्य करती थीं। लॉकडाउन ने उनका काम रोक दिया था, लेकिन स्वनिधि योजना से मिली सहायता ने उन्हें फिर से आत्मनिर्भर बना दिया। कांशीनगर वार्ड क्रमांक 22 के रामरूप पाण्डेय और दर्री वार्ड क्रमांक 58 की सावित्री टंडन के लिए भी यह योजना जीवन में नई रोशनी लेकर आई।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना आज कोरबा के पथ विक्रेताओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्थायित्व और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन चुकी है। संकट काल में बुझ चुके चूल्हों में फिर से आग जली है और जीवन की गाड़ी एक बार फिर मजबूती से आगे बढ़ रही है।



















