
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 5 जनवरी 2026/
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में प्रदेश भर में प्रशासनिक संवेदनशीलता की नई पहचान बन रही है। इसी कड़ी में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे आज केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि गरीबों, पीड़ितों और जरूरतमंदों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आए हैं। प्राकृतिक आपदा से उजड़े परिवारों के लिए उनका त्वरित और मानवीय निर्णय वास्तव में गरीबों के मसीहा के रूप में उन्हें स्थापित करता है।
जिले में हाल ही में घटित तीन अत्यंत दुखद घटनाओं—तालाब में डूबने और आकाशीय बिजली गिरने से हुई मौतों—ने परिवारों को गहरे शोक और आर्थिक संकट में डाल दिया था। ऐसे कठिन समय में कलेक्टर डॉ. कन्नौजे ने बिना किसी विलंब के राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत प्रत्येक मृतक के वारिस को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कर यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशासन केवल नियमों का पालन ही नहीं करता, बल्कि मानव पीड़ा को समझता भी है।
इस निर्णय के अंतर्गत
सारंगढ़ के पैलपारा निवासी तालाब में डूबे मृतक भावेश चौहान की माता चित्तकुंवर चौहान,
सारंगढ़ तहसील के ग्राम जसपुर में आकाशीय बिजली से मृत विजय माली की पत्नी साधमती माली,
तथा बरमकेला तहसील के ग्राम बोईरडीह निवासी मृतक भानु प्रताप साहू की पत्नी सीमा साहू के संयुक्त परिवार को सहायता राशि स्वीकृत की गई।
यह सहायता राशि केवल धन नहीं, बल्कि टूट चुके परिवारों को दोबारा खड़े होने का साहस है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपने पद और अधिकार को कभी घमंड का कारण नहीं बनने देते। वे जमीन से जुड़े प्रशासक हैं, जो फाइलों के बीच नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर निर्णय लेते हैं।
ग्रामीण अंचलों में आज आमजन खुले मन से कह रहे हैं कि “कलेक्टर साहब हमारे दर्द को सुनते हैं, समझते हैं और तुरंत समाधान करते हैं।” यह विश्वास यूं ही नहीं बना, बल्कि लगातार किए जा रहे संवेदनशील, पारदर्शी और जनहितकारी कार्यों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जिले में आपदा पीड़ितों को त्वरित राहत, गरीबों को समय पर सहायता और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना—यह सब कलेक्टर डॉ. कन्नौजे की कार्यशैली का प्रतिबिंब है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि सुशासन का अर्थ सख्ती नहीं, बल्कि संवेदना के साथ लिया गया सही निर्णय है।
आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन एक ऐसे नेतृत्व के हाथों में है, जहां अधिकार के साथ जिम्मेदारी और संवेदना का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है। आपदा की अंधेरी घड़ी में कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे प्रशासन की रोशनी बनकर उभरे हैं—और यही उन्हें एक आदर्श, लोकप्रिय और जनप्रिय कलेक्टर बनाता है।




















