
मुंबई,25 अक्टूबर।
भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्म ‘बाहुबली’ को पूरे 10 साल पूरे हो गए हैं। इस खास मौके पर निर्देशक एस.एस. राजामौली एक ऐसा तोहफा लेकर आए हैं, जिसका इंतज़ार फैंस पिछले कई वर्षों से कर रहे थे। अब ‘बाहुबली – द एपिक’ के नाम से यह महागाथा फिर से बड़े पर्दे पर लौटने जा रही है। फिल्म 31 अक्टूबर 2025 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा रहा है। इसमें दर्शकों को एक बार फिर माहिष्मति साम्राज्य, अमरेंद्र बाहुबली (प्रभास), भल्लालदेव (राणा दग्गुबाती), शिवगामी देवी (राम्या कृष्णन), कटप्पा (सत्यराज) और देवसेना (अनुष्का शेट्टी) जैसे प्रिय किरदारों की याद दिला दी गई है।
दोनों भागों का संगम – एक भव्य अनुभव
‘बाहुबली – द एपिक’ दरअसल फ्रेंचाइज़ी की दोनों फिल्मों ‘बाहुबली: द बिगनिंग’ और ‘बाहुबली: द कन्क्लूज़न’ का एक संयोजन है, जिसे आधुनिक तकनीक और नए साउंड डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। फिल्म का रनटाइम लगभग 3 घंटे 40 मिनट का होगा। इसे नए विजुअल इफेक्ट्स और 4K रेजोल्यूशन में रीमास्टर्ड किया गया है ताकि दर्शकों को पहले से भी ज्यादा भव्य सिनेमाई अनुभव मिल सके।
फिल्म के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से साझा किए गए ट्रेलर में लिखा गया है — “दो फिल्में, एक एपिक अनुभव! पेश है एस.एस. राजामौली की ‘बाहुबली – द एपिक’। 31 अक्टूबर से फिर गूंजेगा माहिष्मति का नारा – ‘जय माहिष्मति!’”
फैंस में उत्साह, ‘बाहुबली 3’ पर सस्पेंस बरकरार
फिल्म निर्माता शोबू यारलगाड्डा ने इंटरव्यू में बताया कि अभी ‘बाहुबली 3’ की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा — “फिलहाल ‘बाहुबली – द एपिक’ ही हमारा सबसे बड़ा सरप्राइज है। हम दर्शकों को दोबारा वही जादू महसूस कराना चाहते हैं, जिसने भारतीय सिनेमा का चेहरा बदल दिया था।” हालांकि उन्होंने यह भी इशारा किया कि भविष्य में इस ब्रह्मांड से जुड़े और भी प्रोजेक्ट आ सकते हैं।
‘बाहुबली’ का भारतीय सिनेमा पर प्रभाव
2015 में रिलीज हुई ‘बाहुबली: द बिगनिंग’ और 2017 की ‘बाहुबली: द कन्क्लूज़न’ ने भारतीय सिनेमा में नई ऊँचाइयाँ छू ली थीं। राजामौली के निर्देशन, के.वी. विजयेंद्र प्रसाद की कहानी और एम.एम. कीरवाणी के संगीत ने इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक बना दिया। इस फ्रेंचाइज़ी ने न केवल प्रभास और राणा दग्गुबाती जैसे कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई बल्कि भारतीय सिनेमा को ग्लोबल मंच पर स्थापित किया।
31 अक्टूबर को फिर होगा ‘जय माहिष्मति’ का उद्घोष
अब 31 अक्टूबर को जब ‘बाहुबली – द एपिक’ सिनेमाघरों में लौटेगी, तो दर्शक सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण देखने जा रहे हैं। दस वर्षों के बाद यह गाथा नए रूप, नई ऊर्जा और पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली अंदाज़ में पर्दे पर उतरेगी।
फैंस के लिए यह किसी जश्न से कम नहीं होगा — क्योंकि “जब तक बाहुबली है, तब तक माहिष्मति अमर है।”



















