
कोरबा :- ग्राम जवाली में 4 वर्ष के पश्चात भोजली छत्तीसगढ़ी पारंपरिक पर्व के अनुरूप भोजली पर्व को पूरे गांव में बड़े धूमधाम से मनाया गया यह पर्व न केवल मित्रता का प्रतीक है बल्कि कृषकों की अच्छी फसल कामना करने का प्रतीक है ग्राम में सुख शांति समृद्धि वैभव एवं सामाजिक सौहाद्रपूर्ण वातावरण निर्मित हो जिसमें ग्रामवासी सहित विशेष तौर पर महिलाओं की उत्साह भागीदारी देखने को मिली ।
ग्राम जवाली में भोजली पर्व की शुरुआत इतिहास
ग्राम में बुजुर्गों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार भोजली पर्व की शुरुआत गांव की जमींदार ठाकुर पारा के परिवार को माना जाता है जिनके घर की महिलाओं द्वारा भोजली माता की स्थापना कर 11 दिनों तक सेवा भाव भजन किया जाता किंतु अब उचित नेतृत्व के अभाव में कई वर्षों के पश्चात इस परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से ठाकुर पारा और ठाकुर देव चौक में भव्य रूप से भोजली पर्व मनाने की योजना भगवान शिव जी के मंदिर मुरई कछार से रखी गई जिसके अनुसार गुड्डाराम कुम्हार के घर में नाग पंचमी पर्व के दिन भोजली बोने का कार्य किया गया जिसके अंतर्गत भोजली माता का सेवा कार्य ठाकुर देव चौक में खाले पारा की बहनों के द्वारा पूरे श्रद्धा भाव के साथ किया गया भोजली विसर्जन के पूर्व आधे रात तक महिलाओं के द्वारा भजन कीर्तन का कार्य किया गया ।
भोजली विसर्जन के दिन दोपहर से एन के डीजे धुन के साथ माइक बाजा में “देवी गंगा देवी गंगा लहर तुरंगा …..” लोकगीत के साथ पारंपरिक वेशभूषा में सजे माता बहनों द्वारा अपने-अपने पात्र को सिर में उठाकर ग्राम के प्रमुख देव स्थलों में जहां-जहां भोजली माता का सेवा भाव किया गया उनके द्वारा गाते नाचते झूमते शोभा यात्रा के साथ पहुंचे इस आयोजन के देख रेख सुरक्षा हेतु युवाओं ने भी अपनी सहभागिता दर्शीई ।
माता और बहनों का उत्साह वर्धन हेतु ग्राम के सरपंच दिलेश कुमार कंवर व जनपद सदस्य कमल बेलदार द्वारा प्रसाद हेतु कुछ रसद सामग्री प्रदान की गई जिसे आयोजन समिति के प्रमुख सदस्यों में मनोज गोपाल सूरज विनीत पुरुषोत्तम हर्ष दीपक पटेल आदि द्वारा निर्माण कार्य किया गया भोजली विसर्जन के पश्चात ग्राम के सिंघाली मोड़ तिराहा के हीरा सिंह कंपलेक्स के सामने में सबको खिचड़ी प्रसाद वितरण किया गया । भोजली पर्व का यह आयोजन केवल जवाली ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्र कोरबा कटघोरा पाली दीपका हरदी बाजार बरपाली जटगा तूमान चैतमा जरार्ली आसपास के क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया यह पर्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकजुटता और हरियाली की कामना का अद्भुत उदाहरण है ।