
रायपुर/छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ में सामने आए बहुचर्चित शराब घोटाले ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। करीब 3200 करोड़ रुपए के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने शिकंजा कस दिया है। शुक्रवार को रायपुर स्थित विशेष कोर्ट में आबकारी विभाग के अधिकारियों सहित 59 आरोपियों की पेशी ने मामले को और गंभीर बना दिया।
सिंडिकेट बनाकर खेला गया पूरा खेल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, तत्कालीन व्यवस्था में एक संगठित सिंडिकेट बनाकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। इसमें कई बड़े अधिकारी, कारोबारी और प्रभावशाली लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच में IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
तीन मॉडल से चला पूरा घोटाला (A, B, C फॉर्मूला)
A मॉडल: डिस्टिलरी से कमीशन वसूली
डिस्टिलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपए तक कमीशन वसूला गया।
इसके लिए शराब की कीमत बढ़ाकर और ओवर बिलिंग के जरिए इस रकम की भरपाई कराई गई।
B मॉडल: नकली होलोग्राम से अवैध बिक्री
नकली होलोग्राम लगाकर अवैध शराब को सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचा गया।
जांच में सामने आया कि करीब 40 लाख पेटी शराब इस तरीके से खपाई गई, जिससे सिंडिकेट को भारी मुनाफा हुआ।
C मॉडल: सप्लाई चेन में हेरफेर
शराब सप्लाई व्यवस्था में बदलाव कर अवैध उगाही का खेल चलाया गया।
जांच एजेंसियों को करीब 52 करोड़ रुपए की उगाही के सबूत मिले हैं।
EOW-ED की लगातार कार्रवाई
बीते दिनों EOW ने कार्रवाई करते हुए शराब कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी की और कई दस्तावेज जब्त किए।
वहीं, कांग्रेस कार्यालय से जुड़े लोगों समेत कई संदिग्धों से पूछताछ भी जारी है।
अभी और बड़े खुलासों की उम्मीद
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला अभी और गहराएगा।
लगातार पूछताछ और पेशियों के बीच कई बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

शराब सिंडिकेट का बड़ा खेल: 3200 करोड़ का घोटाला, ED-EOW की ताबड़तोड़ कार्रवाई”">



















