
कोरबा, 29 दिसम्बर 2025।
ग्रामीण अंचलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत संचालित शासकीय प्राथमिक शाला झुनकीडीह में वर्षों से चली आ रही एकलशिक्षकीय व्यवस्था से आखिरकार मुक्ति मिल गई है। इस बदलाव से विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति को नई गति मिली है और बच्चों के चेहरे पर सीखने का उत्साह साफ दिखाई देने लगा है।
झुनकीडीह प्राथमिक शाला दूरदराज क्षेत्र में स्थित होने के कारण लंबे समय तक शिक्षक की कमी से जूझती रही। विद्यालय में केवल एक शिक्षक के भरोसे सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा था, जिससे नियमित पढ़ाई बाधित होती थी। कई बार एक साथ अनेक कक्षाओं को संभालना संभव नहीं हो पाता था, जिसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा था। इस स्थिति से विद्यार्थी और अभिभावक दोनों ही चिंतित रहते थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के स्पष्ट निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अतिशेष शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण करते हुए उन विद्यालयों में पदस्थापना की गई, जहाँ शिक्षकों की कमी थी। इसी नीति के तहत शासकीय प्राथमिक शाला झुनकीडीह में सहायक शिक्षक श्री देवेंद्र कुमार की पदस्थापना की गई, जिसने विद्यालय के शैक्षणिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया।
श्री देवेंद्र कुमार के आगमन के बाद अब विद्यालय में कोई भी कक्षा शिक्षण से वंचित नहीं रहती। पूर्व में जिन कक्षाओं में शिक्षक के अभाव में पढ़ाई प्रभावित होती थी, वहाँ अब नियमित रूप से शिक्षण सत्र संचालित किए जा रहे हैं। बच्चों को विषयों को समझने का पर्याप्त समय मिल रहा है और शिक्षकों द्वारा व्यक्तिगत ध्यान भी दिया जा रहा है।
विद्यालय के विद्यार्थियों में इस बदलाव को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। कक्षा पाँचवीं की छात्राएँ स्वाति, पूनम, सावित्री और रामसिंह तथा कक्षा चौथी के विद्यार्थी अष्टमी, निशक और कैलाश ने बताया कि नए गुरुजी के आने के बाद रोजाना पढ़ाई होती है और अब कक्षाएं बाधित नहीं होतीं। बच्चों ने कहा कि उन्हें पढ़ाई में अब अधिक रुचि आने लगी है और विषय समझना आसान हो गया है।
झुनकीडीह विद्यालय में आया यह सकारात्मक परिवर्तन स्कूल शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण नीति की एक सफलता की कहानी बनकर सामने आया है। यह पहल न केवल शिक्षकों की कमी को दूर करने में कारगर सिद्ध हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर देकर उनके भविष्य को भी नई दिशा दे रही है।
कुल मिलाकर, यह उदाहरण दर्शाता है कि सरकार की सही नीति और समय पर लिए गए निर्णय किस प्रकार जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बना सकते हैं और बच्चों के सपनों को पंख दे सकते हैं।




















