
कोरबा जिले के पोंडी उपरोड़ा जनपद क्षेत्र में मनरेगा कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण जनता को रोज़गार उपलब्ध कराने तथा उनकी भौतिक सुविधाओं—जैसे खेत-तालाब, मिट्टी कार्य, पानी संरक्षण संरचनाएं—को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा योजना लगातार मज़बूती से संचालित की जा रही है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है: प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम, सम्मान और सुविधा प्रदान करना। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर हर वर्ष करोड़ों रुपये मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण विकास में लगाए जाते हैं।
लेकिन दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर कुछ स्थानों पर लापरवाही की घटनाएँ सामने आने से प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े हैं। हाल ही में पोंडी उपरोड़ा जनपद से मिली रिपोर्ट में कृषि तालाब निर्माण कार्य में मशीन के उपयोग की बात सामने आने पर प्रशासन ने गंभीरता से नोटिस जारी किया है। मनरेगा दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी प्रकार की मशीन—जैसे जेसीबी—का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कार्यस्थल से प्राप्त तथ्यों और शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने इस मामले को गंभीर माना।
जांच के बाद कार्यक्रम अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी पत्र में यह स्पष्ट कहा गया कि सरकार ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए जो बड़ी राशि निवेश करती है, उसका उद्देश्य तभी पूरा होगा जब कार्य पारदर्शी और श्रम आधारित हों। मशीनों के उपयोग से न केवल योजना की भावना का हनन होता है बल्कि ग्रामीणों के मजदूरी दिवस प्रभावित होते हैं। प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि योजना की नियमावलियाँ सभी ग्राम पंचायतों पर समान रूप से लागू हैं और इनका पालन अनिवार्य है।

नोटिस में सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को निर्देशित किया गया कि मनरेगा कार्यों के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता, तथ्य छिपाने, गलत सूचना देने या नियमों की अवहेलना पाए जाने पर भविष्य में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इसी प्रकार की अनदेखी दोहराई गई, तो जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और पंचायत कर्मियों पर ही आएगी।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि मनरेगा योजना को सही दिशा में लागू करना है। सरकार द्वारा दिए जा रहे संसाधनों, धन और साधनों का लाभ सीधे ग्रामीण मजदूरों तक पहुँचे—इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पारदर्शिता, भौतिक सत्यापन और समय पर जानकारी देना ग्राम स्तरीय अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी है।
प्रशासन की इस सख्त चेतावनी ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना दिया है। लोग बड़े स्तर पर यह उम्मीद कर रहे हैं कि कड़े निर्देशों के बाद मनरेगा कार्यों में सुधार होगा और ग्रामीण श्रमिकों को अधिक रोजगार और बेहतर सुविधाएँ प्राप्त होंगी। सरकार की मंशा स्पष्ट है—योजना जनता की है और इसका लाभ जनता को ही मिलना चाहिए।




















