
कोरबा, 15 अक्टूबर 2025।
सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग लगातार प्रयासरत हैं। इसी क्रम में कोरबा जिले से एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहाँ प्राथमिक शाला गोंगरा (वि.ख. पाली) के सहायक शिक्षक एल.बी. अर्जुन कुमार बावे की लापरवाही और कर्तव्यहीनता को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़
प्राप्त शिकायत के अनुसार, शिक्षक अर्जुन कुमार बावे न तो समय पर विद्यालय पहुंचते थे और न ही कक्षाओं में नियमित रूप से पढ़ाते थे। जांच में पाया गया कि वे कक्षा समय में मोबाइल पर व्यस्त रहते थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस स्थिति की शिकायत तहसीलदार हरदीबाजार के माध्यम से की, जिसके बाद पूरे मामले की तहकीकात शुरू हुई।
जांच में साबित हुई लापरवाही
जांच दल ने ग्राम पंचायत और स्कूल विकास समिति के रिकॉर्ड का अध्ययन कर पाया कि शिक्षक की उपस्थिति में गंभीर अनियमितता है। विद्यालय का शैक्षणिक स्तर गिरने का कारण भी इसी लापरवाही को माना गया।
शिक्षा विभाग का सख्त रुख
जिला शिक्षा अधिकारी, कोरबा ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 का स्पष्ट उल्लंघन माना है। उन्होंने आदेश जारी कर शिक्षक को चेतावनी दी है और उनकी वेतनवृद्धि रोकते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
“सरकारी सेवा में रहते हुए शिक्षकों का यह दायित्व है कि वे बच्चों के भविष्य के निर्माण में ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करें। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
— जिला शिक्षा अधिकारी, कोरबा (छ.ग.)
सरकार का संदेश स्पष्ट
राज्य सरकार की नीति साफ है — “शिक्षा में लापरवाही नहीं चलेगी।” मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी अन्य शिक्षक द्वारा भी इसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार किया गया तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।




















