
7 माह तक स्कूल से नदारद शिक्षक को मिलता रहा वेतन, 3.40 लाख से अधिक की राशि पर उठे सवाल
पूर्व में भी भ्रष्टाचार के आरोपों की खबरें, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं—उठ रहे कई सवाल
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा।
कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिपरिया संकुल के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला सुवारघुटरा में पदस्थ सहायक शिक्षक शशि प्रकाश सिंह महीनों तक विद्यालय से अनुपस्थित रहने के बावजूद नियमित रूप से वेतन प्राप्त करते रहे। इस पूरे मामले ने विभागीय व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
बताया जा रहा है कि सहायक शिक्षक शशि प्रकाश सिंह ने 29 जुलाई 2025 को विद्यालय में ज्वाइनिंग दी थी, लेकिन इसके बाद से वे लगातार फरवरी 2026 तक स्कूल से अनुपस्थित रहे। हैरानी की बात यह है कि लगभग 07 महीनों तक विद्यालय से गायब रहने के बावजूद उन्हें नियमित वेतन जारी होता रहा, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 3.40 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति होने की आशंका जताई जा रही है।
विद्यालय के प्रधान पाठक लालजी सोनवानी द्वारा शिक्षक की अनुपस्थिति को उपस्थिति पंजिका में दर्ज करते हुए कई बार मौखिक रूप से ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को अवगत कराया गया था। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुँचाई गई।
स्थानीय सूत्रों का यह भी कहना है कि उक्त शिक्षक से जुड़े अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित कई मामलों की खबरें पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई संदेहों को जन्म देता है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इन पर विभागीय स्तर पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई जा रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं या फिर किसी दबाव में कार्रवाई से बचा जा रहा है?
सूत्रों के अनुसार, यह मामला सामने आने के बाद पोड़ी उपरोड़ा बीईओ कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बन गई है और विभागीय स्तर पर मामले को दबाने तथा लीपापोती करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।
नियमों के अनुसार यदि कोई कर्मचारी बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ वेतन की वसूली भी की जाती है। यदि कर्मचारी के पास अवकाश शेष नहीं होता, तो उस अवधि को लीव विदाउट पे मानते हुए वेतन में कटौती की जाती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि महीनों तक अनुपस्थित शिक्षक को नियमित वेतन कैसे जारी होता रहा, इसकी जिम्मेदारी किसकी है, और क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या सरकारी राशि की वसूली की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय होगी?
इस गंभीर अनियमितता को लेकर अब सबकी नजर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।



















