
कोरबा, 12 मार्च 2026।
उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से कोरबा जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा कटघोरा विकासखंड स्थित केन्द्रीय पेट्रोरसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिपेट) में उपभोक्ता जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को उपभोक्ता संरक्षण कानूनों की विस्तृत जानकारी दी गई और उनके सवालों का समाधान भी किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि उपभोक्ताओं की जागरूकता से ही उपभोक्ता संरक्षण की वास्तविक सार्थकता सिद्ध हो सकती है।
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के निर्देशानुसार कोरबा जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार उपभोक्ता जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों और विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाया जा सके। इसी क्रम में आयोजित इस शिविर में जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्षा रंजना दत्ता, सदस्य ममता दास तथा पंकज कुमार देवड़ा ने विद्यार्थियों को उपभोक्ता अधिकारों और हितों के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम की शुरुआत सिपेट के सभागार में आयोजित छात्र कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत हुई, जहां सिपेट के प्रबंधक राजीव कुमार लिल्हारे ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद छात्रों ने नाटक और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से उपभोक्ता जागरूकता का संदेश प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित सभी लोगों को प्रभावित किया।

इस अवसर पर आयोग के सदस्यों ने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को त्रुटिपूर्ण वस्तुओं, सेवाओं में कमी, अनुचित व्यापार प्रचलनों, कालाबाजारी और धोखाधड़ी जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करना है। यदि कोई उपभोक्ता किसी भी प्रकार की ठगी या शोषण का शिकार होता है तो वह उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर न्याय प्राप्त कर सकता है।
शिविर में ई-जागृति पोर्टल और ई-हियरिंग प्रणाली की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अब उपभोक्ता डिजिटल माध्यम से घर बैठे ही अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं और सुनवाई में भी ऑनलाइन शामिल हो सकते हैं। इससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा शिकायतों का निपटारा भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
छात्रों को दैनिक जीवन में सतर्क रहने की सलाह देते हुए बताया गया कि किसी भी वस्तु को खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और गुणवत्ता चिन्ह जैसे आईएसआई एवं एगमार्क का अवलोकन अवश्य करें। साथ ही हर खरीदारी पर पक्का बिल लेना अनिवार्य बताया गया, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता अपने अधिकारों की रक्षा कर सके।
जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराने के लिए वाद मूल्य के आधार पर पंजीयन शुल्क की जानकारी भी दी गई। इसमें 5 लाख रुपये तक के मामलों में कोई शुल्क नहीं है, जबकि 5 से 10 लाख रुपये तक के मामलों में 200 रुपये, 10 से 20 लाख तक 400 रुपये तथा 20 से 50 लाख तक के मामलों में 1000 रुपये शुल्क निर्धारित है।
कार्यक्रम का संचालन श्वेता जांगड़े ने किया। इस दौरान आयोग के कर्मचारी रामायण पटेल, मनीराम श्रीवास, राजेश्वर इंग्ले सहित सिपेट के तकनीकी प्रबंधक वरुण कुमार गुप्ता, सतीश कुमार गुप्ता, अनिल साहू, श्रीमती बुद्धेश्वरी पटेल तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
नाटक के माध्यम से दिया ‘जागो ग्राहक जागो’ का संदेश
कार्यक्रम में सिपेट के विद्यार्थियों ने नाटक और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से उपभोक्ता जागरूकता का प्रभावशाली संदेश दिया। प्रस्तुतियों में सोशल मीडिया और बैंकिंग से जुड़ी ठगी, मिलावटी सामान की बिक्री तथा उपभोक्ताओं के साथ होने वाले धोखाधड़ी के मामलों को दर्शाया गया। छात्रों ने बताया कि उपभोक्ताओं को हमेशा रसीद लेना, एमआरपी की जांच करना और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ आवाज उठाना चाहिए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘जागो ग्राहक जागो’ का संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया।

जागरूक उपभोक्ता ही सुरक्षित समाज की नींव: सिपेट में उपभोक्ता जागरूकता शिविर, छात्रों को बताए गए अधिकार और कानून">


















