
कोरबा। जिले में सुशासन और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने शिक्षा विभाग से जुड़े निर्णयों की वस्तुनिष्ठ जांच के आदेश जारी किए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, हाल के कुछ प्रशासनिक आदेशों पर उठे प्रश्नों को गंभीरता से लेते हुए यह कदम पारदर्शी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जिला प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल को 15 दिवस के भीतर तथ्यों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद अभिमत सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक हलकों में इसे जिम्मेदार और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
तीन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी
जांच की जिम्मेदारी अनुभवी अधिकारियों को सौंपी गई है—
- (सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, कोरबा)
- (पंचायत विभाग, कोरबा)
- (उपसंचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी, कोरबा)
अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को शामिल किए जाने से यह स्पष्ट है कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण से की जाएगी।
किन बिंदुओं की होगी जांच?
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार जांच में निम्न विषयों पर अभिलेखों एवं सेवा नियमों के आलोक में परीक्षण किया जाएगा—
- दीर्घकालीन अनुपस्थिति के बाद ज्वाइनिंग से संबंधित आदेश।
- निलंबन के पश्चात अल्प अवधि में बहाली और पदस्थापना से जुड़ी प्रक्रिया।
- संलग्नीकरण (अटैचमेंट) आदेशों की नियमसम्मत स्थिति।
जांच दल संबंधित फाइलों, नोटशीट, आदेशों और पक्षकारों के कथनों की समीक्षा करेगा। अंतिम निष्कर्ष जांच प्रतिवेदन के आधार पर ही सामने आएंगे।
प्रशासन की स्पष्ट मंशा: तथ्य आधारित निर्णय
कलेक्टर का यह कदम दर्शाता है कि जिला प्रशासन किसी भी विषय में पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया को सर्वोपरि मानता है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि किसी आदेश पर प्रश्न उठते हैं, तो उनकी तथ्यात्मक जांच कर स्पष्टता लाना प्रशासनिक दायित्व है।
जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रहेगी और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पूर्व सभी संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जाएगा।
15 दिन में रिपोर्ट, आगे की कार्रवाई तय
अब निगाहें जांच प्रतिवेदन पर टिकी हैं। निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात, नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लिए जाएंगे।
कोरबा में यह पहल एक मजबूत संदेश देती है—
सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं।

शिक्षा विभाग में पारदर्शिता की नई पहल: कलेक्टर ने गठित की उच्चस्तरीय जांच टीम">

















