
सारंगढ़ स्थित पुष्पवाटिका गुरु घासीदास बाबा जी ज्ञान स्थल में आयोजित प्रदेशस्तरीय सतनामी समाज युवक–युवती परिचय सम्मेलन, आदर्श विवाह एवं सम्मान समारोह सामाजिक समरसता, संस्कार और नव निर्माण की भावना से ओतप्रोत रहा। इस गरिमामय आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर वक्ताओं ने समाजजनों को संबोधित किया और इसे केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि युवक–युवतियों को दाम्पत्य जीवन प्रदान करने वाला पुण्य कार्यक्रम बताया।
मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आयोजन समाज को सही दिशा देने वाला है, जहाँ युवाओं को योग्य जीवनसाथी चुनने का अवसर मिलता है और आदर्श विवाह के माध्यम से फिजूलखर्ची से दूर, सादगीपूर्ण जीवन का संदेश समाज में जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से समाज में व्याप्त कुरीतियों पर अंकुश लगता है और सामूहिक चेतना का विकास होता है।
इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। शिक्षा, सामाजिक सेवा, खेल, राजनीति एवं अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को मंच से सम्मान प्राप्त हुआ, जिससे समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और प्रेरणा का वातावरण बना। साथ ही आदर्श विवाह करने वाले नवविवाहित जोड़ों को सम्मानित कर उनके सुखद, समृद्ध एवं मंगलमय दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं दी गईं।
मुख्य अतिथि ने कहा कि समाज मानव जीवन की प्रगति का आधार है। व्यक्ति का चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व समाज से ही विकसित होता है। ऐसे सामाजिक आयोजनों से समाज न केवल संगठित होता है, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सहयोग, सम्मान और उत्तरदायित्व की भावना भी मजबूत होती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, संस्कार और संगठन को अपना मूल मंत्र बनाएं।
अपने संबोधन में उन्होंने परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि बाबा जी का संदेश सत्य, अहिंसा और समानता पर आधारित है, जो केवल सतनामी समाज ही नहीं बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए मार्गदर्शक है। आज आवश्यकता है कि हम सभी एकजुट होकर समाज, प्रदेश और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर सामाजिक एकता और उत्साह के रंग में रंगा रहा। इस अवसर पर सामाजिक एवं भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, समाज के वरिष्ठ सदस्य, युवा, महिलाएं एवं बड़ी संख्या में समाजजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि संगठित समाज ही सशक्त समाज की पहचान है, और ऐसे प्रयास भविष्य में समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।




















