
कोरबा | पौड़ी उपरोड़ा विकासखंड | छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ शासन ने धान खरीदी को किसान-हितैषी और पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट नियम तय कर रखे हैं। शासन के अनुसार प्रति बोरा धान की खरीदी 40 किलो निर्धारित है और किसानों से किसी भी प्रकार की मजदूरी नहीं कराई जानी चाहिए। लेकिन कोरबा जिले के पौड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत धान उपार्जन केंद्र कुल्हरिया से सामने आ रही जमीनी तस्वीर इन नियमों से अलग नजर आती है।
मौके पर जाकर देखी गई सच्चाई
जब हमारी टीम स्वयं कुलहड़िया धान मंडी पहुंची और मौके की स्थिति देखी, तो वहां किसान केवल धान बेचने नहीं, बल्कि पूरा काम करते हुए नजर आए। बोरे की सिलाई, धान की भराई, उठाव और तौल तक—लगभग हर कार्य किसान खुद करते दिखाई दिए। मंडी परिसर में यह दृश्य सामान्य व्यवस्था की तरह चलता नजर आया।
किसानों ने बताया कि यहां यही तरीका अपनाया जाता है। जबकि शासन के नियमों के अनुसार यह कार्य मंडी प्रबंधन और अधिकृत हमालों द्वारा किया जाना चाहिए।

अन्य मंडी बनाम कुल्हरिया मंडी
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान किसानों ने यह भी बताया कि अन्य धान मंडियों में 40 किलो या अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम तक ही तौल ली जा रही है, लेकिन कुलहड़िया धान मंडी में स्थिति अलग है। यहां प्रति बोरा कुल मिलाकर 41 किलो 200 ग्राम से 41 किलो 300 ग्राम तक धान लिया जा रहा है।
यानी अन्य मंडियों की तुलना में कुलहड़िया मंडी में सीधे 500 से 600 ग्राम अधिक तौल की बात सामने आ रही है। यह अंतर पूरे सीजन और सैकड़ों बोरों में जुड़कर किसानों के लिए बड़ा नुकसान बन सकता है।
किसानों को नियमों की जानकारी नहीं
ग्रामीण किसानों का कहना है कि उन्हें शासन द्वारा तय तौल मानकों की पूरी जानकारी नहीं है। मंडी में जो तौल हो रही है, वे उसे ही सही मान लेते हैं। पूछने पर अक्सर यही जवाब मिलता है कि “यही नियम है”। उपज बेचने की मजबूरी में किसान अधिक सवाल नहीं कर पाते।
मजदूरी भी किसान की जिम्मेदारी?
धान खरीदी नियमों में साफ उल्लेख है कि मजदूरी भुगतान के लिए शासन द्वारा अलग से राशि दी जाती है। इसके बावजूद कुल्हरिया मंडी में किसान खुद हमाल-कुली की भूमिका निभाते नजर आए। यह स्थिति छोटे और सीमांत किसानों पर अतिरिक्त बोझ डालती है।

प्रशासनिक निर्देश और जमीनी अमल
कोरबा जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर से बार-बार यह निर्देश दिए जाते रहे हैं कि धान खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। लेकिन जब मौके पर किसान खुद मजदूरी करते हुए और मानक से अधिक तौल की जानकारी देते दिखें, तो यह निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि कुलहड़िया धान मंडी की तौल मशीनों, खरीदी रजिस्टर, मजदूरी भुगतान और कार्य व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि जब अन्य मंडियों में 40.700 किलो में खरीदी हो रही है, तो कुलहड़िया मंडी में 41.300 किलो क्यों लिया जा रहा है।
धान किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत के हर दाने की रक्षा करना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह ग्राउंड रिपोर्ट उसी जवाबदेही की मांग करती है।




















