
कोरबा | पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड
समाज में जब संवेदनाएं कमजोर पड़ने लगती हैं और लोग अपनों को भी भूल जाते हैं, ऐसे समय में कुछ लोग और संस्थाएं मानवता की लौ जलाए रखती हैं। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है SJR टीम ने, जिसने एक अज्ञात, लावारिश और सड़न की अवस्था में पड़ी लाश को न सिर्फ पहचान दी, बल्कि उसे सम्मान, मर्यादा और मानवोचित अंतिम विदाई भी दी।
दिनांक 21 जनवरी 2026 को जटगा पुलिस चौकी प्रशासन द्वारा SJR टीम को सूचना दी गई कि कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम रानी अटारी के जंगलों में लगभग दो दिन पुरानी एक अज्ञात लाश पड़ी हुई है। पुलिस द्वारा आवश्यक जांच और प्रयासों के बावजूद मृतक की पहचान नहीं हो सकी।
सूचना मिलते ही SJR टीम ने बिना किसी देरी के मानवीय कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए मौके पर पहुंचकर उस लाश के कफ़न-दफ़न की जिम्मेदारी उठाई। लाश अत्यंत दयनीय अवस्था में थी, सड़ चुकी थी और कीड़े लग चुके थे, बावजूद इसके SJR टीम ने बिना किसी संकोच, भय या भेदभाव के मानवता का परिचय दिया।

पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद कटघोरा नगर स्थित राधा सागर के समीप नीलगिरी के जंगलों में विधिवत, शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। यह पूरा कार्य जटगा पुलिस चौकी में पदस्थ आरक्षक संजीव कंवर (बैच नंबर 643) के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
इस पूरे मानवीय कार्य में पोस्टमार्टम, कीट व्यवस्था, निजी एंबुलेंस, कफ़न सामग्री एवं अंतिम संस्कार तक का समस्त व्यय SJR टीम के संस्थापक सेंटी गर्ग द्वारा स्वयं वहन किया गया, जो निस्वार्थ सेवा और सच्ची मानवता का जीवंत उदाहरण है।
SJR टीम केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 2018 को सेंटी गर्ग के जन्मदिवस के अवसर पर हुई थी। शुरुआत कटघोरा अस्पताल में मरीजों के परिजनों को भोजन सेवा से हुई, जो आज निरंतरता के साथ आगे बढ़ रही है। वर्तमान में SJR टीम चार जिलों में 17 सेवा प्रकल्पों के माध्यम से समाजसेवा कर रही है।
टीम द्वारा दो शासकीय अस्पतालों में प्रतिदिन सुबह चाय सेवा, रात्रि भोजन सेवा, बस स्टैंड व नगर भ्रमण के दौरान प्रभुजनों को भोजन वितरण जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं। यह सब समाजिक सहयोग और समाजिक समरसता के भाव से किया जा रहा है।
SJR टीम और इसके संस्थापक सेंटी गर्ग की सोच स्पष्ट है—
“कोई भी व्यक्ति चाहे अनजान हो या बेसहारा, जीवन में या मृत्यु के बाद, उसे सम्मान मिलना चाहिए।”
आज जब लोग लावारिश शव से दूरी बना लेते हैं, उस समय SJR टीम का आगे आना यह साबित करता है कि मानवता अभी जिंदा है—और वह SJR जैसे सेवा संकल्पों में सांस ले रही है।


















