
रायपुर। सद्गुरु कबीर साहेब द्वारा स्थापित बंश बियालिस प्रणाली के अंतर्गत कबीरपंथ के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। कबीरपंथ के 16वें वंशाचार्य पंथश्री उदितमुनी नाम साहेब का विधिवत चादर तिलक समारोह बसंत पंचमी के पावन अवसर पर 23 जनवरी को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ सम्पन्न होगा। यह ऐतिहासिक समारोह 15वें वंशाचार्य पंथश्री हुजूर प्रकाश मुनि नाम साहेब के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा।
इस पावन आयोजन में देश-विदेश से लाखों की संख्या में कबीरपंथ के श्रद्धालु, संत, महात्मा और अनुयायी शामिल होंगे। कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा को भव्य रूप से सजाया गया है, जहां फूलों की आकर्षक सजावट, भजन-कीर्तन और सत्संग का अद्भुत वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करेगा। बसंत पंचमी से प्रारम्भ होने वाला यह माघ मेला 2 फरवरी माघ पूर्णिमा तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विशाल भोजन भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

कबीरपंथ की परंपरा अनुसार गुरु गद्दी दामाखेड़ा में यह माघ मेला हर वर्ष आयोजित होता है, जो न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि सामाजिक समरसता और मानवता का भी संदेश देता है। पंथश्री उदितमुनी नाम साहेब सद्गुरु कबीर धर्मदास वंशावली केडीव्ही मिशन के प्रवर्तक हैं और वे जीव दया व आत्म पूजा के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारते हुए समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय हैं।
इसी क्रम में उनके मार्गदर्शन में जरूरतमंद बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए “सद्गुरु कबीर गुरुकुल” की स्थापना की गई है, जहां बच्चों को उच्च शिक्षा के साथ नैतिक और आध्यात्मिक संस्कार भी दिए जा रहे हैं। यह गुरुकुल कबीर साहेब के मानव कल्याण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
कुल मिलाकर, दामाखेड़ा में होने वाला यह चादर तिलक समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सेवा और भक्ति के संगम का प्रतीक होगा, जो कबीरपंथ की गौरवशाली परंपरा को और सुदृढ़ करेगा।


















