
सक्ती | 20 जनवरी 2026 (सूत्रों के अनुसार)
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतिम और सबसे संवेदनशील दौर में पहुंच चुकी धान खरीदी को लेकर सक्ती जिला प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि अब लापरवाही, अनियमितता और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। शासन की मंशा के अनुरूप कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के सख्त निर्देशों पर प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। दिन हो या रात—धान खरीदी से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं, जिससे गड़बड़ी करने वालों में हड़कंप मच गया है।

इसी कड़ी में कलेक्टर के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ एवं धान खरीदी के नोडल अधिकारी श्री वासु जैन द्वारा आधी रात धान खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। यह कार्रवाई न केवल अप्रत्याशित थी, बल्कि भ्रष्ट तंत्र की नींव हिला देने वाली साबित हुई। जैसे ही प्रशासनिक टीम ने डभरा विकासखंड अंतर्गत धान खरीदी केंद्र पुटीडीह में दबिश दी, वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
निरीक्षण के दौरान भौतिक सत्यापन में केंद्र पर 23,294 बोरे धान पाए गए, जबकि ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज आंकड़ों से तुलना करने पर 9,426 बोरे धान कम निकले। यही नहीं, जांच में यह भी उजागर हुआ कि धान के वजन को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए मिट्टी और कंकड़ मिलाने का गंभीर खेल खेला जा रहा था। यह न केवल शासन के धन से खिलवाड़ था, बल्कि किसानों और सरकारी व्यवस्था—दोनों के साथ धोखा भी था।

कलेक्टर के निर्देश पर मौके पर ही त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम डभरा श्री विनय कश्यप, तहसीलदार मनमोहन ठाकुर, खाद्य विभाग की टीम और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया गया। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि धान की कमी छिपाने के लिए हमालों के माध्यम से पहले से खरीदी गई बोरियों में मिट्टी-कंकड़ मिलाकर मात्रा पूरी करने का प्रयास किया जा रहा था। जिला स्तरीय जांच टीम की रात्रिकालीन गश्त ने इस साजिश को समय रहते बेनकाब कर दिया।
नोडल अधिकारी लोकनाथ मैत्री द्वारा संबंधित धान को विधिवत जप्त कर आगे की कार्रवाई प्रारंभ की गई। यह पूरी कार्रवाई प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का जीवंत उदाहरण बन गई है।
कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि धान खरीदी का यह अंतिम चरण अत्यंत संवेदनशील है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई या बेईमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन के पैसों में चोरी या अनियमितता करने वालों के खिलाफ बिना पूर्व सूचना के कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर दोषियों को जेल भेजने से भी प्रशासन पीछे नहीं हटेगा।
यह कार्रवाई उन किसानों के लिए भरोसे की मिसाल है, जो ईमानदारी से अपनी उपज बेचते हैं, और साथ ही उन अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए कड़ा संदेश है, जो शासन की योजनाओं को बदनाम करने का प्रयास करते हैं।
सक्ती जिला प्रशासन की यह सख्ती यह साबित करती है कि सरकार की मंशा साफ है—कृषकों के हक पर कोई डाका नहीं डाल सकेगा।




















